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नेताओं के भाषण का फैक्ट चेक नहीं करेगी फेसबुक

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने हाल ही में कहा कि वह नेताओं के भाषणों के फैक्ट चैकिंग का काम नहीं करेगी। यानि फेसबुक पर चलने वाला नेताओं का भाषण सीधे जनता तक पहुंचेगा, कोई भी थर्ड पार्टी उसकी सत्यता की पड़ताल नहीं करेगी।

नेताओं के भाषण का फैक्ट चेक नहीं करेगी फेसबुक

साल 2020 में अमेरिका में प्रेसीडेंट इलेक्शन होने जा रहे हैं और उससे पहले फेसबुक ने ये कदम उठाया है। हालांकि फेसबुक फेक न्यूज़ रोकने के लिए दुनियाभर में फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम की शुरूआत की थी। कंपनी ने चुनिंदा थर्ड पार्टी एंजेसियों को हायर किया था जो झूठी इंफर्मेशन को जनता तक पहुंचने से रोक सके।

भारत के साथ सोशल नेटवर्किंग साइट का ये प्रोग्राम अर्जेंटिना, ब्राजील, कनाडा, कोलंबिया, डेनमार्क, फ्रांस, इंडोनेशिया, आयरलैंड, इटली, जर्मनी, केन्या, मैक्सिको, नीदरलैंड, नॉर्वे, पाकिस्तान, फिलिपींस, स्वीडन, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की और अमेरिका में चलाया गया था।

नहीं होगी नेताओं के भाषण की जांच

फेसबुक के ग्लोबल अफेयर्स के वाइस प्रेसिडेंट निक क्लेग ने कहा कि हमें नहीं लगता कि राजनीतिक बहस में रेफरी बनकर नेताओं के भाषणों को सीधे जनता तक पहुंचने से रोकना चाहिए। हमें सार्वजनिक बहस और जांच पड़ताल का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। इसके लिए अब से फेसबुक पॉलीटिकल कॉन्टेंट को थर्ड पार्टी के पास नहीं भेजेगी।

साल 2016 में अमेरिका में हुए इलेक्शन्स में रूस के कथित दखल के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रेशर है कि पॉलीटिकल कॉन्टेंट को लेकर पारदर्शी रहे। रूस पर साइबर-इंफ्लूएंस कैंपेन के आरोप लगने के बाद फेसबुक फेक न्यूज़ की पड़ताल करने की कवायद में जुट गई थी। अब कंपनी का नेताओं को इस कैटेगरी से बाहर करना उसके लिए विवाद खड़ा कर सकता है।

क्लेग ने कहा, फेसबुक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ध्यान रखना चाहती है हालांकि गलत सूचनाओं पर उसकी कड़ी नजर रहेगी। उन्होंने बताया कि नेताओं के भाषण को न्यूज़ कॉन्टेंट माना जाएगा और उनका फैक्ट चैक नहीं कराया जाएगा।

पूर्व वीडियो और तस्वीरों की होगी जांच

फेसबुक ने बताया कि अगर नेता कोई अपना पुराना भाषण, वीडियो या कोई लिंक शेयर करता है तो उसकी पड़ताल की जाएगा और फैक्ट्स साबित होने के बाद ही यूज़र्स के पास पहुंचाया जाएगा और इसे किसी एड का हिस्सा नहीं मानेंगे। क्लेग ने कहा कि जकरबर्ग ने ट्रांसपैरेंसी बढ़ाने खासतौर पर पॉलिटीकल एड के मामले में कड़े कदम उठाए हैं।

फर्जी कंटेंट पर नेकल जारी

ग्लोबल अफेयर्स वाइस प्रेसीडेंट क्लेग ने कहा कि भड़काऊ और फेक कंटेंट पर नकेल कसने के लिए कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट करेगी और साथ ही तीस हजार लोगों की नियुक्ति भी करेगी। स्टैंडफोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 के मुकाबले फेसबुक पर अब फेक न्यूज में दो-तिहाई की कमी आई है।

 
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English summary
The social media platform Facebook recently said that it will not do the fact-checking of speeches of leaders. That is, the speech of the leaders on Facebook will reach the public directly, no third party will investigate its truth.
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