एप्पल के जनक स्टीव के बारे में जानें ये ख़ास बातें
स्टीव जॉब्स, आज के समय में शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जो इस नाम को नहीं जनता है। स्मार्टफोन के बाजार में राज करने वाली सबसे बढ़ी कंपनी एप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स को आज गुजरे हुए 4 साल बीत चुके हैं। शायद यह कम ही लोग जानते होंगे की भारत में स्टीव का गहरा लगाव था। स्टीव जॉब्स के करीबियों के अनुसार उनकी कुछ आदतें उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी शायद यही कारण था वे एक कामयाब व्यक्ति थे।
स्टीव जॉब्स के बारे में जाने ये खास बातें-
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अक्टूबर 2001 को जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में हमला हुआ था उसके बाद अमेरिका में मंदी के बादल छाए हुए थे मगर उसी समय एप्पल ने आईपॉड लांच किया था जो काफी पसंद किया। स्टीव जॉब्स हमेशा आगे बढ़ने की सोंच रखते थे उनका कहना था चाहें जितनी मुसीबतें आएं हमेशा आगे की ओर देखना चाहिए।
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स्टीव जॉब्स का मानना था कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए यह तय करना जरुरी है कि अगले 5 साल में आप क्या पाना चाहते हैं और उसे पाने के लिए आपको आज से ही उसकी तरफ कदम बढ़ाना होगा।
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स्टीव जॉब्स के अनुसार लोग अपने जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं। वे राजमर्रा की जिंदगी में प्रयोग होने वाले गैजेट को बदलना चाहते हैं उनकी इसी सोंच ने अमेरिका को ऐसी कंपनी दी जो पूरे विश्व में लोगों को यूनीक गैजेट प्रोवाइड करती है। आज एप्पल का हर प्रोडेक्ट अपने आप में अलग होता है।
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2001 में जॉब्स ने जब आईपॉड लांच किया था तो उन्होंने उपभोक्ताओं को न केवल एक ऐसी डिवाइस दी थी बल्कि करीब 1,000 गानों को उपभोक्ता अपनी पॉकेट में रख सकते थे जो उस समय लोगों के लिए एक अनोखा अनुभव था। वहीं आज एप्पल आईपॉड का साइज एक घड़ी के बराबर हो चुका है। जो पूरे विश्व में पसंद किया जाता
है।
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जॉब्स को 1984 में अपनी ही कंपनी एप्पल से निकाल दिया गया था। 2005 में एक कॉन्फ्रेंस में भाषण देते हुए जॉब्स ने कहा कि मैंनें तब नहीं सोचा था, लेकिन अब लगता है कि एप्पल से निकाला जाना मेरे लिए सबसे अच्छा था। इससे अच्छा मेरे लिए कुछ और हो ही नहीं सकता था। उस समय मैंने फिर से नई शुरुआत की, और वह मेरी जिंदगी का सबसे क्रिएटिव समय रहा।
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जॉब्स ने अकेले एप्पल की शुरुआत नहीं की थी। उनके पार्टनर थे स्टीव वॉजनायक। जॉब्स और वॉजनायक की जोड़ी ने एप्पल को आज दुनिया की नंबर 1 टेक कंपनी बना दी।
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अपना एडॉप्शन हो या कंपनी से निकला जाना, जॉब्स ने इन सभी बातों को सकारात्मक तरीके से लिया। वे अपने एडॉप्टिव पैरेंट्स के शुक्रगुजार थे और उनके भी जिन्होंने उन्हें जन्म देकर छोड़ दिया था। जॉब्स ने खुद को कंपनी से निकल दिए जाने कि बात को भी पॉजिटिव रूप में लिया था।
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यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि स्टीव जॉब्स बौद्ध धर्म का पालन करते थे और शाकाहारी भी थे।
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जॉब्स आध्यात्मिक ज्ञान के लिए अपने एक अजीज मित्र के साथ वर्ष 1974 में भारत आए थे। उनकी इच्छा थी कि वह अध्यात्म और अस्तित्वाद को गहराई से जान सकें।
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एप्पल की स्थापना करने के एक साल पहले जॉब्स भारत आए थे। जॉब्स के मुताबिक नई जगहों पर जाने और घूमने से व्यक्ति का दृष्टिकोण बढ़ता है।


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