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गेम की दुनिया बनी आखिरी दुनिया: गाजियाबाद में तीन बहनों की दर्दनाक मौत, ‘कोरियन लव गेम' पर उठे सवाल

गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में बुधवार तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर तीन नाबालिग बहनों ने अपनी जान दे दी। मृतक बहनें निशिका, प्राची और पाकी कथित तौर पर एक कोरियन 'लव गेम' की आदी थीं, जिसे लेकर अब गेमिंग एडिक्शन पर गंभीर बहस छिड़ गई है।

पुलिस के अनुसार, घटना भारत सिटी सोसाइटी के एक टावर में हुई। तड़के करीब 2:15 बजे सूचना मिली कि तीन लड़कियां नौवीं मंज़िल से नीचे कूद गई हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि तीनों बहनें गंभीर रूप से घायल अवस्था में जमीन पर पड़ी थीं। उन्हें तुरंत लोनी के 50 बेड अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

गेम की दुनिया बनी आखिरी दुनिया: गाजियाबाद में तीन बहनों की दर्दनाक मौत

'सॉरी पापा...' सुसाइड नोट ने बढ़ाई चिंता

पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें किसी खास ऐप का नाम नहीं है, लेकिन उसमें कोरियन कल्चर और गेम्स के गहरे प्रभाव की बात सामने आई है। डीसीपी ट्रांस-हिंडन निमिष पाटिल के अनुसार, यह साफ है कि लड़कियां कोरियन कंटेंट और गेमिंग से मानसिक रूप से काफी प्रभावित थीं।

'कोरियन ही उनकी जिंदगी बन गया था'

मृतक बच्चियों के पिता चेतन कुमार ने बताया कि उनकी बेटियां कोविड काल से ही इस गेम को लगातार खेल रही थीं।
उन्होंने कहा, "वे मुझसे कहती थीं- पापा, हम कोरियन नहीं छोड़ सकते। कोरियन ही हमारी जिंदगी है। अगर हमें इससे अलग किया गया, तो हम जान दे देंगे। आज सुसाइड नोट देखकर समझ नहीं आ रहा क्या कहूं। मैं सभी माता-पिता से अपील करता हूं कि बच्चों पर नजर रखें।"

स्कूल से भी बन चुकी थी दूरी

पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें कोविड के बाद से स्कूल नहीं जा रही थीं और दिन-रात साथ रहकर गेम खेलती थीं। परिवार ने कई बार इस आदत पर आपत्ति जताई, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। एसीपी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, तीनों बहनें हर काम साथ करती थीं- खाना, नहाना, सोना और यहां तक कि पढ़ाई भी लगभग बंद हो चुकी थी।

जांच जारी, कई पहलुओं पर नजर

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गेम के अलावा और कौन-कौन से कारण इस बेहद दुखद फैसले के पीछे रहे। यह घटना न सिर्फ एक परिवार का निजी दुख है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया और बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

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