ग्लेशियर ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता, 2031 में शुरू हो सकती है 'आपदा'!
थ्वाइट्स ग्लेशियर, जिसे डूम्सडे ग्लेशियर भी कहा जाता है, अंटार्कटिका के प्रमुख ग्लेशियरों में से एक है. जब दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव दिखाई दे रहे हैं, तो इस ग्लेशियर की स्थिति क्या है? वैज्ञानिक इस पर शोध कर रहे हैं और उन्हें जो जानकारी मिली है, उसने चिंता बढ़ा दी है.

थ्वाइट्स ग्लेशियर आकार में अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के बराबर है. अनुमान है कि इसके पिघलने से समुद्र का स्तर दो फीट ऊपर उठ जाएगा, जो तबाही लाएगा. वैज्ञानिकों को पता है कि थ्वाइट्स ग्लेशियर भी पिघल रहा है और हर साल करीब 50 अरब टन बर्फ को पानी में बदल रहा है.
CNN की रिपोर्ट ने नेचर जियोसाइंस जर्नल में सोमवार को प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला दिया. इसमें लिखा गया है कि थ्वाइट्स ग्लेशियर का आधार समाप्त हो रहा है. जानकारी के मुताबिक, पहली बार शोधकर्ताओं ने इस ग्लेशियर के नीचे समुद्र के स्तर को मैप करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया. वैज्ञानिकों ने जो खोजा उसने उन्हें स्तब्ध कर दिया. इस ग्लेशियर का आधार पिछली दो शताब्दियों में समुद्र तल से अलग हो गया है और प्रति वर्ष 2.1 किमी की दर से पीछे हट रहा है.
वैज्ञानिक लंबे समय से थ्वाइट्स ग्लेशियर पर नजर रख रहे हैं. यह पहली बार 1973 में टूटने के बारे में सोचा गया था. वर्ष 2020 में इसकी छवियों के एक अध्ययन में पाया गया कि थ्वाइट्स और उसके पड़ोसी पाइन द्वीप ग्लेशियर पहले की तुलना में तेजी से टूट रहे थे.

अनुमान है कि आने वाले समय में यह ग्लेशियर अपने समुद्री रिज से तेजी से पीछे हट सकता है, जो अभी भी इसे नियंत्रित कर रहा है. अध्ययनों से पता चलता है कि इसकी बर्फ की शेल्फ 2031 की शुरुआत में समुद्र में गिर सकती है.
आप की जानकारी के लिए बता दें कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया में देखा जा रहा है. कहीं बादल फट रहा है तो कहीं सूखा पड़ रहा है. कुछ देशों की बात करें तो लोग सूखा पड़ने की वजह से पानी के लिए परेशान है. वहीं गर्मी भी हर दिन बढ़ रही हैं.
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