गूगल ने आज डूडल में मनाया सिनेमा को जन्म देने वाला का व्यक्ति का 218वां जन्मदिन
क्या आपने आज गूगल के डूडल पर गौर किया है...? गूगल अक्सर अपने डूडल के जरिए दुनियाभर के तमाम ऐसे वयक्तियों को याद करता है, जिन्होंने अपने जीवन में जन कल्याण के लिए के काम किए हैं। आज भी गूगल ने ऐसे ही एक व्यक्ति को याद किया है।

इस व्यक्ति का नाम Joseph Antoine Ferdinand Plateau है। वह बेल्जिम के रहने वाले थे। आज उनका 218वां जन्मदिन है, जिसे गूगल डूडल के लिए जरिए मना रहा है और दुनिया को उनके बारे में जानने और उन्हें याद करने को कह रहा है।
Joseph Antoine Ferdinand Plateau कौन थे...?
अगर आप Joseph Antoine Ferdinand Plateau के बारे में नहीं जानते हैं तो हम आपको बता दें कि दुनियाभर में सिनेमा को जन्म देने वाले Joseph Antoine Ferdinand Plateau ही थे। उनकी वजह से ही आप पूरी दुनिया आधुनिक सिनेमा बना पाती है और देख पाती है। वो बेल्जिम के रहने वाले थे और दुनिया के प्रसिद्ध भौतिकी वैज्ञानिक थे।
Joseph Antoine Ferdinand Plateau दुनिया के उन कुछ पहले लोगों में से एक थे, जिन्होंने इमेज के भ्रम को प्रदर्शित करने में पहली बार कामयाबी पाई थी। इमेज के भ्रम को प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने काउंटर रोटेटिंग डिस्क का उपयोग किया था और इसके साथ गति की छोटी वृद्धि में खींची गई इमेज को दोहराया था। इस तरह से उन्होंने उपयोग करके phenakistiscope नाम का एक यंत्र या कहें कि एक डिवाइस का अविष्कार किया था। उसी डिवाइस के कारण दुनिया में सिनेमा का जन्म हुआ।

कैसे हुआ सिनेमा का जन्म
गूगल ने आज अपने डूडल के बीच में एक चक्र जैसा इमेज बनाया है, जो मूव कर रहा है। दरअसल, गूगल ने इसके जरिए Plateau's style की एक झलक दिखाने की कोशिश की है। कुछ इसी तरीके से उस वक्त Joseph Antoine Ferdinand Plateau ने phenakistiscope स्कोप की मदद से मूविंग इमेज का भ्रम पहली बार पैदा किया था। जिसकी वजह से दुनिया में सिनेमा का निर्माण हुआ और आज सिनेमा आधुनिक होते-होते एक अलग स्तर पर पहुंच गया है।
Joseph Antoine की निजी जिंदगी पर गौर डाले तो उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद कानून की पढ़ाई पूरी की। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद Joseph Antoine ने फिजियोलॉजी ऑप्टिक्स का अध्यन किया। फिजियोलॉजी ऑप्टिक्स का पढ़ाई करने के बाद उन्होंने खासतौर पर इंसानों की रेटिन पर प्रकाश और रंग के बारे में काम किया। आपको बता दें कि अपने जीवन के अंतिम दिनों ने उन्होंने अपनी आंखें खो दी थी, उन्हें दिखाई नहीं देता था लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक विज्ञान में अपना योगदान दिया।


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