फ्री सेवा देने के बाद भी हर मिनट लाखों कमाता है गूगल
आप शायद ही यह जानते होंगे कि गूगल कंपनी अपने यूजर्स को मुफ्त सेवा देने के बाद भी करोड़ों रुपए कमाती है। Gizmodo Australia वेबसाइट की माने तो 2015 की क्यू2 यानि दूसरी तिमाही में गूगल की कुल कमाई 17.3 बिलियन डॉलर अर्थात् लगभग 109284.1 करोड़ रुपए रही जिसमें से 97 फीसदी मात्र विज्ञापनों का था।
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इसी प्रकार वर्ष 2014 में प्रत्येक मिनट गूगल द्वारा 149,288 डॉलर यानि लगभग 99 लाख रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया गया। इसमें 23509 डॉलर यानि लगभग 15 लाख रुपए लाभ है।

इसके साथ-साथ गूगल एडवर्टाइजिंग स्ट्रैटजी में कीवर्ड्स के मुताबिक भी पैसा कमाती है। wordstream.com के आलेख में बताया गया है कि 20 सबसे एक्सपेंसिव कीवर्ड्स में से पहला इन्श्योरेंस व दूसरा लोन कीवर्ड है। यद्यपि यह आंकड़े समय-समय पर बदलते भी रहते हैं। investopedia.com का कहना है कि गूगल की ऐड पॉलिसी काफी हद तक कॉस्ट पर क्लिक मॉडल पर चलती है। मतलब यदि एडवर्टाइजर के पेज पर कोई भी क्लिक नहीं हुआ तो उसे कोई पैसा नहीं देना। ऐसे ही जितने ज्यादा क्लिक होंगे, उतनी अधिक पेमेंट करनी होगी।
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आपको बता दें कि वास्तव में होता यह है कि जिन गूगल सर्विस को हम फ्री समझकर इस्तेमाल करते हैं उन्हीं से गूगल कमाई करता है। हमारी बहुत सारी इन्फारमेशन्स दूसरी कंपनियां गूगल से खरीदती हैं। ये कंपनियों गूगल को विज्ञापन भी देती हैं जिनपर प्रत्येक क्लिक का गूगल को पैसा मिलता है जोकि कुछ सेंट से सैकड़ों डॉलर तक होता है।
गूगल विज्ञापन से पोटेंशियल क्लाइंट्स को टारगेट बनाना सरल हो जाता है क्योंकि जैसे ही पोटेंशियल क्लाइंट गूगल पेज के पोस्ट पर दिए गए ऐड पर क्लिक करता है, वैसे ही गूगल उस कंपनी से पैसे चार्ज करती है। इसे गूगल ने AdWords नाम दिया है। इसके साथ ही गूगल की एक ओर सर्विस है-AdSense। इससे गूगल को दोहरा रेवेन्यु मिलता है। गूगल की माने तो उसे AdWords से 70 प्रतिशत ऐड रेवेन्यु मिलता है तथा शेष AdSense सर्विस से मिलता है।
गूगल दूसरी वेबसाइट्स को होम पेज पर ऐड पोस्ट करने को भी देती है। इसके अंतर्गत विषय के अनुकूल वेबसाइट को गूगल ऐडसेंस सर्विस द्वारा होम पेज के लिए विज्ञापन दिए जाते है। इसका फायदा गूगल, संबंधित वेबसाइट व ऐड देने वाली कंपनियों को मिलता है। गूगल को रेवेन्यु मोबाइल ओएस एंड्रॉयड से भी आता है। एक रिपोर्ट बताती है कि गूगल प्लेस्टोर की कमाई जल्दी ही एप्पल के आईट्यून्स स्टोर के बराबर हो जाएगी। आंकड़ों की माने तो गूगल प्लेस्टोर 2018 तक कमाई के मामले में एप्पल के आईट्यून्स स्टोर को भी पीछे छोड़ देगा।


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