गूगल सर्च से हो रही है 'डिजिटल एम्नेशिया' बीमारी
आप भी अगर गूगल पर सर्च करते हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि इससे आपमें ‘डिजिटल एम्नेशिया' बीमारी पैदा हो सकती है। यह हम नहीं कह रहे ऐसा कहना है रूस की कास्परस्काइ लैब नामक सिक्योरिटी फर्म का। इसने एक इंटरनेशनल स्टडी के बाद यह नतीजा निकला है कि एक तिहाई यूजर्स सवाल पूछे जाने पर उसका जवाब खुद ढूंढ़ने की अपेक्षा गूगल पर सर्च करने लगते हैं।

वजह चाहे कोई भी हो पर इससे पता चलता कि या तो इन यूजर्स को अपनी याददाश्त पर भरोसा नहीं है अथवा फिर वे जानकारी पाने के लिए कुछ ज्यादा ही उतावले थे। इससे पहले वाली रिसर्च से भी यह बात निकलकर आई थी कि जानकारी को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उसे बार-बार दिमाग में रिकाॅल किया जाए। दूसरी ओर यह भी सत्य है कि इंटरनेट पर जानकारी को बार-बार देखने जैसे उपायों से आपकी लाॅन्ग टर्म मैमोरी कमजोर हो जाती है।
आपको बता दें कि 16 वर्ष और उससे अधिक आयु के 6 हजार लोगों पर की गई यह अंर्तराष्ट्रीय स्टडी से प्रमुख रूप से यह बात निकलकर आई है कि दिमाग में कैद जानकारी को यदि हम बार-बार उपयोग न करे तो हम उसे भूल जाते हैं। इस स्टडी के कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैंः
एक चैथाई लोग गूगल द्वारा दी हुई जानकारी तुरंत ही भूल जाते हैं। इसका अर्थ है कि जरूरी जानकारी गूगल पर देखने के बाद उनके दिमाग से गायब हो जाती हैं।
हम इंटरनेट को अपने दिमाग का एक्सटेंशन मानने लगे हैं। कोई भी जानकारी याद रखने की अपेक्षा हम इंटरनेट पर सेव करके निश्चित हो जाते हैं। इसकी वजह से तथ्यों को याद रखने की हमारी दिमागी क्षमता को जंग लगता जा रहा है।


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