अब गूगल बेचेगा अपना 'Titan' USB Security Keys
गूगल हमेशा यूजर्स के लिए अपनी सर्विस को बेहतर बनाता रहता है, ताकि यूजर्स को किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े। अब गूगल अपने ग्राहक के खातों को हैक होने से रोकने के लिए अपनी खुद की यूएसबी सिक्योरिटी की (Key) बेचना शुरू करने वाला है। Google ने बताया है कि टाइटन सिक्योरिटी कीस, जिसमें यूएसबी और ब्लूटूथ दोनों शामिल होंगे, अगले कुछ महीनों में गूगल के ऑनलाइन स्टोर में बिकने शुरू हो जाएंगे। सीएनईटी का कहना है कि यूएसबी और ब्लूटूथ दोनों के साथ एक बंडल में आएगा जिसकी कीमत $ 50, $ 20- $ 25 यानि भारतीय बाजार में 3431 रुपए, 1372 रुपए से 1715 रुएप तक हो सकती है।

ब्लूटूथ के साथ काम करेगा डिवाइस
गूगल के पहचान और सुरक्षा के प्रोडक्ट मैनेजर क्रिस्टियान ब्रांड ने कहा कि 'हम सुरक्षा की गुणवत्ता में काफी यकीन रखते हैं। 'हम इस बात से बहुत ध्यान रखते हैं कि हम यूजर्स के सिक्रेट्स को कैसे संभाल कर रखें। जिससे हमलावर को अंदर आने और सिक्योरिटी को उड़ा देने में काफी मुश्किल होगी। टाइटन यूएसबी पोर्ट या ब्लूटूथ कनेक्शन के साथ किसी भी डिवाइस मे काम करेगा। Google ने बताया कि इस सिक्योरिटी डिवाइस से हम अपने कर्मचारियों के खातों को हैक होने से रोक पाएंगे।
क्रेब्सऑन सेक्योरिटी के मुताबिक, 2017 में, टेक जायंट ने सभी 85,000 कर्मचारियों को फिज़िकल सिक्यूरिटी कीस प्रदान की थी। सिक्यूरिटी कीस सस्ती यूएसबी-आधारित डिवाइस हुआ करती थी। जो अक्सर $ 20 से कम लागत वाली होती हैं, जिसके लिए यूजर्स को किसी वेब साइट पर लॉग इन करने की जरूरत होती है। जिसके बाद आपको अपना पासवर्ड सेट करना होता है। Google ने बताया कि तब से किसी भी कर्मचारी ने कार्य-संबंधित खातों को टेकओवर किए जाने की कोई सूचना नहीं दी है।
गूगल की सिक्यूरिटी सिस्टम
शोधकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ पासवर्ड के साथ आपके खाते की सुरक्षा करना अक्सर काफी नहीं होता है। इसके लिए कई तकनीकी फर्मों ने नई चीजों को डेवलप किया है। जिसके लिए मोबाइल फोन या हार्डवेयर कीस की आवश्यकता होती है। Google द्वारा उपयोग की जाने वाली सुरक्षा कुंजी प्रणाली यानि सिक्यूरिटी कीस सिस्टम इसी का एक उदाहरण है।
इस सिक्योरिटी कीस के चलते हैकर अगर आपका पासवर्ड जानता भी है, फिर भी वह आपके खाते में लॉग इन नहीं कर सकता है। जब तक कि वे उस दूसरे कारक को हैक या पास न करें तब तक वो लॉग इन नहीं कर पाएगा। जो उसके लिए काफी मुश्किल होगा। Google द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सिक्यूरिटी कीस multi-factor authentication का इस्तेमाल करती है। जिसे यूनिवर्सल 2 फैक्टर कहा जाता है।
साथ ही ड्रॉपबॉक्स, फेसबुक, Github और Google की सेवाओं सहित साइटें नए उपकरणों का समर्थन करती है।, यू 2 एफ क्रोम, फ़ायरफ़ॉक्स और ओपेरा को सपोर्ट करती है। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि इस साल के अंत में यू 2 एफ का समर्थन करने के लिए अपने फ्लैगशिप एज ब्राउज़र में अपडेट शुरू करने की भी उम्मीद है।


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