पॉपुलर ऑनलाइन होली कविताएं

    अगर आप कविताओं के शौकीन है तो आपको कविताएं लिखने का काफी शौक होगा। होली के इस पॉवन अवसर पर ऑनलाइन होली के ऊपर लिखीं गईं कविताएं काफी पंसद की जा रही हैं। वैसे तो लोग होली एसएमएस और ग्रीटिंग ही ऑनलाइन भेजते हैं लेकिन कविताओं का अपना एक अलग मजा है।

    हम आपके लिए आज इंटरनेट पर पसंद की जा रही होली की कुछ कविताएं लाए हैं, उम्‍मीद है आपको ये कविताएं पसंद आएंगी।

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    होली कविताएं

    रंगवाले देर क्या है मेरा चोला रंग दे ।
    और सारे रंग धो कर रंग अपना रंग दे ॥

    कितने ही रंगो से मैने आज तक है रंगा इसे ।
    पर वो सारे फीके निकले तू ही गाढ़ा रंग दे ॥

    तूने रंगे हैं ज़मीं और आसमां जिस रंग से ।
    बस उसी रंग से तू आख़िर मेरा चोला रंग दे ॥

    मैं तो जानूंगा तभी तेरी ये रंगन्दाज़ियां ।
    जितना धोऊं उतना चमके अब तो ऐसा रंग दे ॥

     

    होली कविताएं

    उमरिया हिरनिया हो गई, देह इन्द्र- दरबार।
    मौसम संग मोहित हुए, दर्पण-फूल-बहार॥
    शाम सिंदूरी होंठ पर, आंखें उजली भोर।
    भैरन नदिया सा चढ़े, यौवन ये बरजोर॥
    तितली झुक कर फूल पर, कहती है आदाब।
    सीने में दिल की जगह, रक्खा लाल गुलाब॥
    रहे बदलते करवटें, हम तो पूरी रात।
    अब के जब हम मिलेंगे, करनी क्या-क्या बात॥
    मन को बड़ा लुभा रही, हंसी तेरी मन मीत।
    काला जादू रूप का, कौन सकेगा जीत॥
    गढ़े कसीदे नेह के, रंगों के आलेख।
    पास पिया को पाओगी, आंखें बंद कर देख॥

    - मनोज खरे

     

    होली कविताएं

    रंग फुहारों से हर ओर
    भींग रहा है घर आगंन
    फागुन के ठंडे बयार से
    थिरक रहा हर मानव मन !

    लाल गुलाबी नीली पीली
    खुशियाँ रंगों जैसे छायीं
    ढोल मजीरे की तानों पर
    बजे उमंगों की शहनाई !
    गुझिया पापड़ पकवानों के
    घर घर में लगते मेले
    खाते गाते धूम मचाते
    मन में खुशियों के फूल खिले !

    रंग बिरंगी दुनिया में
    हर कोई लगता एक समान
    भेदभाव को दूर भागता
    रंगों का यह मंगलगान !

    पिचकारी के बौछारों से
    चारो ओर छाई उमंग
    खुशियों के सागर में डूबी
    दुनिया में फैली प्रेम तरंग !

     

    होली कविताएं

    अबकी होली में हो जाये,कुछ एसा अदभुत चमत्कार
    हो जाये भ्रष्टाचार स्वाहा, महगाई,झगड़े, लूटमार
    सब लाज शर्म को छोड़ छाड़,हम करें प्रेम से छेड़ छाड़
    गौरी के गोरे गालों पर ,अपने हाथों से मल गुलाल
    जा लगे रंग,महके अनंग,हर अंग अंग हो सरोबार
    इस मस्ती में,हर बस्ती में,बस जाये केवल प्यार प्यार
    दुर्भाव हटे,कटुता सिमटे,हो भातृभाव का बस प्रचार
    अबकी होली में हो जाये,कुछ एसा अदभुत चमत्कार

    मदन मोहन

     


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