आखिर क्यों कोरोना वायरस के इस दौर में चंद्रमा आया पृथ्वी के नजदीक...? पढ़िए और जानिए...!
आजकल चारों ओर सिर्फ और सिर्फ एक ही बात के चर्चे सुनाई देते हैं और वो है कोरोना वायरस। इस वायरस ने पिछले 4-5 महीनों में दुनिया की कमर तोड़ दी है और सभी सुर्खियां बटौर ली है लेकिन हमारे चंदा मामा भी पिछले 2 महीने से पूर्णिमा के दिन सुर्खियां बटौरान में लगे हुए हैं। 2020 का अगला सूपरमून 7 मई को दिखाई देगा।

सूपरमून कल यानि 7 मई को ईडीटी 6:45 बजे यानि 4:15 बजे आईएसटी पर दिखाई देगा। इस वजह से कल का चंद्रमा पूरी तरह से चमकदार दिखाई देगा। आपको बता दें कि परंपरागत रूप से मई में आने वाली पूर्णिमा को फ्लॉवर मून कहा जाता है। ऐसे में कल होने वाले फूल मून का नाम Super Flower Moon 2020 होगा।
हालांकि दुर्भाग्य से ये सुपरमून भारत में भारत में नहीं दिखाई देगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय समयनुसार इस सूपरमून को शाम 4.15 मिनट पर देखा जा सकता है, जो उस वक्त दिखाई नहीं देगा क्योंकि भारत में तभी दोपहर का वक्त होगा। अगर आप उस दिन इस घटना को देखना चाहते हैं तो आप उसी वक्त इसे ऑनलाइन इंटरनेट के माध्यम से लाइव देख सकते हैं। Slooh अपने यूट्यूब चैनल पर इस घटना को लाइव दिखाएगा। आप वहां से इस घटना को देख सकते हैं। हम इस आर्टिकल में भी नीचे उस दिन के लिंक को अटैच कर रहे हैं जिससे आप यहीं से सुपरमून को देख पाएंगे।
सूपरमून का रहस्य
आपको बता दें कि सूपर मून के दौरान पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी कम हो जाती है क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी से काफी नजदीक आ जाता है। इस बार के सूपरमून के दौरान पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 3,56,907 किमी रह जाएगी। जबकि आमतौर पर पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 3,84,400 किमी होती है।
7 मई को भी चंद्रमा पृथ्वी के ऑर्बिट के काफी नजदीक में आएगा और इस वजह से पृथ्वी से चंद्रमा काफी बड़ा और चमकीला दिखाई देगा। आम तौर पर हम जानते हैं कि पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 3,84,000 यानि 3 लाख 84 हजार किमी. होती है लेकिन 8 अप्रैल को पृथ्वी और चंद्रमा की दूसरी 3,56,907 यानि 3 लाख, 56 हजार, 9 सौ सात किमी. होगी। लिहाजा उस दिन पृथ्वी से चंद्रमा की दूसरी 27,093 किमी. कम हो जाएगी। इस वजह से चंद्रमा काफी बड़ा और चमकीला दिखाई देगा और इसी वजह से ऐसे दिन दिखने वाले चंद्रमा को सुपरमून कहा जाता है।
पूर्णिमा और सूपरमून में अंतर
हालांकि आपको एक बात बता दें कि ऐसा जरूरी नहीं होता है कि पूर्णिमा में ही सुरपमून दिखाई दे। असल में चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक अंडाकार ऑर्बिट में चक्कर लगाता है। ऐसे में वो कई बार पृथ्वी से काफी दूर भी होता है और वहां से भी फुलमून यानि पूर्णिमा दिखाई देता है। लिहाजा, ऐसा जरूरी नहीं है कि फुलमून के वक्त ही सुपरमून दिखाई दे। सुपरमून तभी दिखाई देगा जब चंद्रमा पृथ्वी के नजदीक होगा।


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