आसान भाषा में समझिये कैसे Snickometer पता लगाता है बल्‍ले से गेंद टकराई है या नहीं?

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कैसे इस टेक्नोलॉजी से पता चलता है बल्‍ले से गेंद टकराई है या नहीं?

क्रिकेट में बहुत सारे बदलाव हो चुके, जो खेल की बेहतरी में योगदान करते हैं और जिसकी मदद से अंपायरों के निर्णय लेने में आसानी करने में मदद करते हैं। कुछ वर्षों के अंतराल में, टेक्नोलॉजी भी खेल का एक अभिन्न अंग बन गई है। स्पीड गन, स्पाइडरकैम, डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS), स्निकोमीटर, हॉट स्पॉट के अलावा कई लेटेस्‍ट और एडवांस तकनीक अब इसमें जुड़ चुकीं हैं इससे खेल की पूरी प्रकृति बदल गई। इसी तरह से क्रिकेट में स्निकोमीटर का प्रयोग किया जाता है। आइये जानते हैं की आखिर क्‍या होता है स्निकोमीटर और कैसे करता है ये काम

 

Snickometer का इतिहास

क्रिकेट के खेल में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अंपायरों के काम को आसान बनाने के उद्देश्य से खेल में कई डेवलॅपमेंट हुए हैं। इसके अलावा, विवादों से बचने के लिए, कई और टेक्नोलॉजी विशेषताएं पेश की गई हैं।

स्निकोमीटर 90 के दशक के मध्य में वापस आता है जब इसका आविष्कार ब्रिटिश कंप्यूटर वैज्ञानिक एलन प्लास्केट (Allan Plaskett) ने किया था। तब से, अंपायरों को निष्पक्ष निर्णय लेने में मदद करने के लिए कई स्थितियों में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। स्निकोमीटर टेक्नोलॉजी को यूके के चैनल 4 द्वारा 1999 में पेश किया गया था।

कैसे इस टेक्नोलॉजी से पता चलता है बल्‍ले से गेंद टकराई है या नहीं?

How Does Snickometer Work in Cricket?

स्निकोमीटर एक स्टंप में स्थित एक बहुत ही संवेदनशील माइक्रोफोन से बना होता है, जो एक आस्टसीलस्कप से जुड़ा होता है जो ध्वनि तरंगों को मापता है। जब गेंद बल्ले से टकराती है, तो आस्टसीलस्कप ट्रेस ध्वनि को पकड़ लेता है वहीं, एक हाई स्पीड कैमरा बल्ले से गुजरने वाली गेंद को रिकॉर्ड करता है।

 

ऑसिलिस्कोप ट्रेस तब बल्ले से गुजरने वाली गेंद के स्लो मोशन के वीडियो के साथ दिखाया जाता है, और ध्वनि तरंग के आकार से आप यह निर्धारित कर सकते हैं कि माइक्रोफ़ोन द्वारा उठाया गया शोर बल्ले से गुजरने वाली गेंद के साथ मेल खाता है या नहीं। यह एक प्रकार का माइक्रोफोन है जो विभिन्न आवृत्तियों की ध्वनियों को पकड़ता है जो तब उत्पन्न होती हैं जब गेंद बल्ले या किसी लेग पैड से टकराती है।

LBW फैसलों में होता है ज्यादा इस्तेमाल

इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल टेलीविज़न क्रिकेट मैचों में बल्ले से गुजरने वाली गेंद के वीडियो को एक ही समय में किसी भी ध्वनि के ऑडियो को ग्राफिक रूप से दिखाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग केवल टेलीविजन दर्शकों को अधिक जानकारी देने और यह दिखाने के लिए किया जाता है कि गेंद वास्तव में बल्ले पर लगी या नहीं। 'स्निको' देखने का फायदा अंपायरों को नहीं मिलता है।

 
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English summary
Snickometer produces an ambient sound or picks up any sound when the ball passes through and then amplifies the appropriate signal

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