आकाश टैबलेट अब पहुंचा अमेरिका

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भारत में बना सबसे सस्ता टैबलेट आकाश के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने की बात कही गई थी। भारत में यह परियोजना सरकारी विलंब और विवादों में फंस गई। बहरहाल 50 डॉलर कीमत का आकाश टैबलेट दर्जनों देशों में चर्चा का विषय बना हुआ है और संयुक्त राष्ट्र में पिछले नवंबर में उसे प्रदर्शित भी किया गया।

 

अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना प्रांत में आकाश ने पहला पायलट प्रोजेक्ट अभी पूरा ही किया है। इस परियोजना में 100 आकाश टैबलेट 10 वर्ष के कम उम्र के बच्चों के ग्रीष्मकालीन शिविर में दिए गए थे। इसका उद्देश्य आकाश की मदद से बच्चों को अगली कक्षा के लिए तैयार करना था। कैरोलिना पायलट परियोजना के पीछे साफ्टवेयर उद्यमी क्रिस इवांस का हाथ है। एक अन्य उद्यमी विवेक वाधवा से आकाश के बारे में सुनकर इवांस ने अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना के गैर लाभकारी समुदायिक स्कूलों के लिए 100 टैबलेट की कीमत देने का फैसला किया।

आकाश टैबलेट अब पहुंचा अमेरिका

वाधवा इस कम कीमत वाले टैबलेट के प्रचारक ही बन गए हैं। उन्होंने इस टैबलेट और शिक्षा व्यवस्था में उससे आने वाले बदलावों के बारे में वाशिंगटन पोस्ट, फारेन पालिसी डॉटकाम और अन्य जगहों पर लिखते रहे हैं। वह यह भी मानते हैं कि आकाश के कारण अमेरिका में टैबलेट की कीमतों में कमी भी आ सकती है।

 

आकाश को लंदन स्थित डाटा विंड कंपनी ने भारत के मानव संसाधन विकास मंत्रालय और सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय के लिए डिजाइन किया था। पहले चरण में करीब एक लाख आकाश टैबलेटों की आपूर्ति की गई थी। सरकार की योजना आकाश टैबलेट को कक्षा 7 और 8 के सभी बच्चों को देने की थी।

 
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