जानते हैं रैनसमवेयर अटैक के जोखिम में कौन से नंबर पर है इंडिया ?
आप हर रोज रैनसमवेयर अटैक से जुड़ी खबरें पढ़ते होंगे। इनमें से कई मामले इंडिया से भी जुड़े हुए सामने आए हैं। हाल ही में रैनसमवेयर अटैक से जुड़ी एक और जानकारी सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि इंडिया को निशाना बनाया जा सकता है। क्या आप जानते हैं कि रैनसमवेयर अटैक के हाई रिस्क वाले देशों में इंडिया कौन से नंबर पर आता है ? आपको बता दें कि भारत उन टॉप 7 देशों में शामिल है, जहां रैनसमवेयर का खतरा सबसे ज्यादा है। इन सात रैनसमवेयर अटैक के हाई रिस्क वाले देशों में इंडिया तीसरे नंबर पर आता है।

ग्लोवल नेटवर्क और एंड प्वाइंट सिक्यूरिटी के क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सोफोस ने 'सोफोसलैब्स 2018 मालवेयर फोरकास्ट' नामक एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें कंपनी ने बताया कि इस साल दुनिया भर में विंडोज, एंड्रॉयड, लिनक्स और मैकओएस सिस्टम पर साइबर हमलों बढ़े हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि दो तरह के एंड्रॉयड हमले का खतरा बढ़ रहा है- बिना एनक्रिप्टिंग डेटा के फोन लॉक करना और डेटा के एनक्रिप्टिंग के दौरान फोन को लॉक करना।
सोफोसलैब्स के सिक्योरिटी रिसर्च डोरका पालोटे ने शनिवार 4 नवंबर को एक बयान में कहा, "रैनसमवेयर ज्यादातर विंडोज कंप्यूटर को निशाना बनाता है, लेकिन इस साल सोफोसलैब्स ने दुनियाभर के हमारे ग्राहकों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले अलग-अलग डिवाइसों और ऑपरेटिंग सिस्टम्स पर इनके हमले में बढ़ोतरी को देखा है।"
wannacrypt रैनसमवेयर साल 2017 के मई में सामने आया था, जो दुनिया का सबसे बड़ा रैनसमवेयर था। वहीं साल 2016 की शुरुआत में server रैनसमवेयर ने कई देशों में तबाही मचाई थी और ये उस समय का सबसे बड़ा रैनसमवेयर था। सोफोसलैब्स की ट्रैकिंग में सामने आया कि 45.3 परसेंट डिवाइस में wannacrypt रैनसमवेयर और 44.2 परसेंट डिवाइस server रैनसमवेयर से प्रभावित थे।
वहीं एंड्रॉइड यूजर्स को लेकर भी एक जानकारी सामने आई है। अपनी रिपोर्ट में कंपनी ने कहा कि एंड्रॉइड यूजर्स के लिए भी रैनसमवेयर एक बड़ा खतरा बन चुका है। रिसर्चर ने कहा "यह जानना महत्वपूर्ण है कि एंड्रॉयड रैनसमवेयर मुख्य तौर से गैर-गूगल प्ले मार्केट में पाए गए हैं। यह एक और कारण है कि यूजर्स बहुत सर्तक रहें कि वे कहां से और किस प्रकार का एप डाउनलोड कर रहे हैं।"


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