Chrome यूजर्स के लिए CERT-In की हाई-अलर्ट चेतावनी; पुराना ब्राउजर बना सकता है सिस्टम को हैकर्स का आसान निशाना
Chrome Users Of High-Risk: भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने डेस्कटॉप यूजर्स के लिए एक अहम चेतावनी जारी की है। एजेंसी के मुताबिक Google Chrome के पुराने वर्ज़न में कई गंभीर सुरक्षा खामियां पाई गई हैं, जिनका फायदा उठाकर हैकर्स सिस्टम पर रिमोट अटैक कर सकते हैं।
16 मार्च 2026 को जारी एडवाइजरी (CIVN-2026-0141) में कहा गया है कि Chrome के 146.0.7680.80 से पहले के वर्ज़न macOS, Windows और Linux जैसे प्लेटफॉर्म्स पर जोखिम पैदा कर सकते हैं। ऐसे में यूजर्स और कंपनियों दोनों को तुरंत जरूरी कदम उठाने की सलाह दी गई है।

क्या है असली खतरा?
CERT-In के अनुसार इन खामियों का फायदा उठाकर हमलावर सिस्टम में मनमाना कोड (Arbitrary Code) चला सकते हैं। इसका मतलब है कि हैकर्स किसी भी प्रभावित कंप्यूटर पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं, डेटा चुरा सकते हैं या सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
यह खतरा खासतौर पर Chrome के Skia ग्राफिक्स इंजन में मौजूद आउट-ऑफ-बाउंड्स राइट फ्लॉ से जुड़ा है। यह तकनीकी खामी सिस्टम की मेमोरी को गलत तरीके से एक्सेस करने का रास्ता खोल देती है, जिससे सुरक्षा कमजोर पड़ जाती है।
कौन-सी कमजोरियां ज्यादा गंभीर?
एडवाइजरी में दो खास कमजोरियों को ज्यादा खतरनाक बताया गया है:
- CVE-2026-3909
- CVE-2026-3910
एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इन कमजोरियों का दुनियाभर में दुरुपयोग होने की आशंका है। इसलिए यह जरूरी है कि यूजर्स अपडेट को नजरअंदाज न करें।
किन यूजर्स पर ज्यादा असर?
यह खतरा उन सभी लोगों और संगठनों पर हो सकता है जो Google Chrome का पुराना डेस्कटॉप वर्ज़न इस्तेमाल कर रहे हैं।
- व्यक्तिगत यूजर्स
- छोटे व्यवसाय
- कॉर्पोरेट नेटवर्क
- सरकारी या शैक्षणिक संस्थान
अगर सिस्टम समय पर अपडेट नहीं किया गया, तो संवेदनशील डेटा तक अनधिकृत पहुंच का खतरा बढ़ सकता है।
संभावित नुकसान क्या हो सकता है?
CERT-In के मुताबिक इन कमजोरियों का फायदा उठाकर हैकर्स कई तरह के नुकसान पहुंचा सकते हैं:
- सिस्टम पूरी तरह से हैक या कंट्रोल हो सकता है
- महत्वपूर्ण फाइलें या निजी डेटा चोरी हो सकता है
- सर्विस या नेटवर्क डिसरप्शन हो सकता है
- मालवेयर या स्पायवेयर इंस्टॉल किया जा सकता है
यह खतरा खासतौर पर उन यूजर्स के लिए ज्यादा है जो पब्लिक नेटवर्क या असुरक्षित वेबसाइट्स का इस्तेमाल करते हैं।
अपने सिस्टम को कैसे सुरक्षित रखें?
साइबर एजेंसी ने यूजर्स को कुछ जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है:
- Chrome को तुरंत अपडेट करें
ब्राउजर का लेटेस्ट वर्ज़न इंस्टॉल करना सबसे जरूरी और प्रभावी उपाय है।
- सिक्योरिटी पैच लागू करें
ऑपरेटिंग सिस्टम और अन्य सॉफ्टवेयर अपडेट भी समय-समय पर इंस्टॉल करें।
- संदिग्ध लिंक या वेबसाइट से बचें
अनजान ईमेल अटैचमेंट या लिंक पर क्लिक करने से पहले सावधानी बरतें।
- एंटीवायरस और फायरवॉल का इस्तेमाल करें
सिक्योरिटी टूल्स सिस्टम को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- ऑटो-अपडेट फीचर ऑन रखें
इससे भविष्य में आने वाले अपडेट अपने-आप इंस्टॉल होते रहेंगे।
बढ़ते साइबर हमलों के बीच सावधानी जरूरी
हाल के वर्षों में साइबर अटैक्स के मामलों में तेजी आई है। ऐसे में सॉफ्टवेयर अपडेट को नजरअंदाज करना बड़ी गलती साबित हो सकता है। कई बार सिर्फ कुछ मिनट की देरी भी सिस्टम को खतरे में डाल सकती है।
CERT-In ने साफ कहा है कि यूजर्स को डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना चाहिए और समय-समय पर अपने डिवाइस को अपडेट करते रहना चाहिए।
Google Chrome में पाई गई ये नई कमजोरियां दिखाती हैं कि साइबर सुरक्षा आज के डिजिटल दौर में कितनी अहम हो गई है। अगर आप Chrome का इस्तेमाल करते हैं, तो तुरंत अपडेट करना और जरूरी सिक्योरिटी कदम उठाना बेहद जरूरी है। छोटी-सी सावधानी आपके डेटा और सिस्टम को बड़े खतरे से बचा सकती है।


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