बिना इंटरनेट नहीं जी सकते इंडियन
क्या आप इंटरनेट यूज किए बिना रह सकते हैं ? अगर हां, तो कितनी देर ? ऐसा हम नहीं Ipsos नामक ऑर्गानाइजेशन ने पूरी दुनिया में मौजूद इंटरनेट यूजर्स से पूछा। इसके बाद जो जवाब और आकड़े निकलकर आए हैं वो आपको हैरान कर देंगे। इस पोल में देश के 82 फीसदी लोगों ने कहा कि इंटरनेट के बिना जिंदगी है। इस पोल में 23 देशों को शामिल किया गया था, जिसमें टॉप 10 सिटी की लिस्ट सामने आई है। यहां 82 परसेंट के साथ इंडिया पहले स्थान पर है।

Ipsos ने किया था सर्वे-
ऑनलाइन पोल के ज़रिए Ipsos ने दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले लोगों से पूछा कि क्या वह इंटरनेट के बिना रह सकते हैं और अगर हां, तो कितनी देर। जवाब सभी को हैरान कर देने वाला था। बिना इंटरनेट जिंदगी को सोचना भी कठिन बताने वाले देशों में पहले नंबर पर भारत का नाम आया। ये सर्वे 23 मुल्कों के 18,180 लोगों से पूछा गया था।
82 परसेंट ने माना बिना इंटरनेट जिंदगी बोझिल-
ये माना जा सकता है कि इंडिया में इंटरनेट की दिवानगी चरम पर है, लेकिन ये जवाब हैरान कर देने वाला है कि कुल आबादी का 82 परसेंट मानता है कि इंटरनेट के बिना वह नहीं रह सकते हैं।
टॉप थ्री में यूके और चीन भी शामिल-
लिस्ट में पहले स्थान पर भारत के 'बाजी' मारने के बाद दूसरे स्थान पर यूनाइटेड किंगडम का नाम आता है। यहां 78 फीसदी लोग मानते हैं कि बिना इंटरनेट वो अपनी जिंदगी के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। वहीं तीसरे स्थान पर चीन है।
इटली-जापान हैं पीछे-
जर्मनी यूएस में करीब 73 परसेंट लोग इंटरनेट को जीवन में काफी अहम मानते हैं। वहीं टॉप 10 लिस्ट में 62 परसेंट के साथ नवें स्थान पर इटली और दसवें स्थान पर जापान है।
इंटरनेट को क्यों जरूरी मानते हैं यूजर्स-
इंटरनेट यूजर्स पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं और इंटरनेट पर बिताया जाने वाला समय भी बढ़ता जा रहा है। पहले जहां लोग सिर्फ काम निबटाने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करते थे, वहीं अब लोग सिर्फ काम पूरे करने के लिए इंटरनेट को छोड़ते हैं। इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल में सोशल नेटवर्किंग साइट ने अहम भूमिका निभाई है। यूजर्स काम के अलावा घंटो सोशल साइट और इंटरनेट सर्फिंग करते हैं। कई बार इंटरनेट कनेक्शन कमजोर होने या उपलब्ध न होने पर यूजर्स परेशान हो जाते हैं और लगता है कि इंटरनेट के बिना भी क्या कोई जिंदगी है। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो कोई ये कोई अजीब बात नहीं है, खुद को को इस 82 फीसदी का हिस्सा समझिए।


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