ई नाक से पता चलेगी टीबी की बीमारी

भारतीय वैज्ञानिक एक ऐसी रिर्सच में जुटे हुए है जो आने वाले समय में लाखों लोगों का एक नया जीवन प्रदान करेगी। वैज्ञानिक एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक नाक बना रहे हैं जिससे सांस का परीक्षण किया जाएगा और ट्यूबरकुलोसिस जैसी खतरनाक बीमारी का पता लगाया जा सकेगा।
इस नई ई नाक में तकनीकी रूप से एक छोटी बैटरी और छोटा उपकरण लगा होगा जो ई नाक बिल्कुल उसी तरह से काम करेगी जैसे अल्कोहल की गंध को पहचानने वाला उपकरण करता है, अक्सर पुलिए इस उपकरण का प्रयोग करती है। यह ई नाक नई दिल्ली के जेनेटिक इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी अंतरराष्ट्रीय सेंटर और कैलिफोर्निया की नेक्स्ट डाइमेन्शन टेक्नोलॉजी मिलकर तैयार करने में लगे हुए है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है 2013 तक यह खास ई नाक तैयार कर ली जाएगी फिलहाल ई नाक पर कई परिक्षण किए जा रहें है। कीमत में मामले में ई नाम बजट के अंदर होगी। इसके कहीं भी प्रयोग किया जा सकेगा, यहां तक की गांवों में भी जहां बिजली की काफी समस्या बनी रहती है।
अगर आकड़ों में नजर डालें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक टीबी से पीड़ित एक व्यक्ति से साल में कम से कम 10 से 15 लोग संक्रमित हो जाते हैं और करीब 1.7 मिलियन लोग हर साल इस बीमारी से काल के गाल में समा जाते हैं।
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