क्या खत्म हो जाएगी Google की बादशाहत? क्यों कम हो रहा 'सर्च इंजन' का क्रेज
किसी रेसिपी के बारे में पता करना हो, पढ़ाई-लिखाई से जुड़ा कोई सवाल हो या फिर बात देश में हो रही हलचल पर नजर रखने की हो। सबका जवाब देगा रे तेरा Google! जी हां, गूगल जिसे सालों से इंटरनेट सर्च का सम्राट माना जाता है, अब अपनी पकड़ धीरे-धीरे खोता नजर आ रहा है। इसकी वजह बहुत सारी हैं। लोगों के जेहन में सवाल है कि क्या गूगल की बादशाहत खत्म हो जाएगी। क्योंकि पिछले कुछ समय में सर्च इंजन का क्रेज लोगों के बीच घटा है।
हम इस खबर का आधार बनाएंगे पिछले साल आई एक रिपोर्ट को। जिसमें बताया गया कि 2024 के अंत में पहली बार Google का ग्लोबल सर्च इंजन मार्केट शेयर नीचे गिरा। पहले गूगल का सर्च इंजन मार्केट में शेयर 90% था, जो मौजूदा वक्त में फिसलकर 89.74% पर आ टिका है।

नंबर्स में ये संख्या भले ही 10-11% प्रतिशत है, लेकिन यूजर्स में कन्वर्ट करने जाएंगे तो करोड़ों होते हैं। यानी, पिछले कुछ समय में करोड़ों लोगों ने गूगल सर्च इंजन को प्रायोरिटी देना बंद कर दिया है या किसी और सर्च इंजन पर भरोसा जताने लगे हैं। आइए एक-एक करके समझते हैं सारे फैक्टर्स को।
गूगल से लोगों का मोहभंग क्यों?
गूगल से लोगों का मोहभंग होने के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है AI बेस्ड सर्च इंजनों का तेजी से उभरना। ChatGPT, Perplexity AI जैसे प्लेटफॉर्म अब यूजर्स को सटीक, तेज और इंसानी भाषा में जवाब दे रहे हैं। ये सर्च इंजन यूजर को दस-दस लिंक दिखाने के बजाय सीधे सॉल्यूशन देते हैं, जिससे यूजर का समय बचता है और अनुभव बेहतर होता है। और अपन को यही सब तो चाहिए।
विज्ञापन और स्पैम लिंक
दूसरा बड़ा कारण है गूगल पर बढ़ते विज्ञापन और स्पैम लिंक। आज गूगल सर्च करते वक्त पहले पेज पर आधे से ज्यादा परिणाम Sponsored होते हैं। SEO से भरे कंटेंट फार्म्स और बकवास वेबसाइट्स के चलते असली जानकारी दब जाती है। यूजर्स को अब यह अनुभव सताने लगा है कि वे गूगल पर सवाल पूछते हैं, जवाब नहीं बल्कि प्रोडक्ट और प्रमोशन मिलते हैं।

प्राइवेसी बड़ी चिंता
डिजिटल दौर में प्राइवेसी की इच्छा न करें। ऐसा लोगों को Google यूज करके लग सकता है। लेकिन DuckDuckGo जैसे प्राइवेसी-फोकस्ड सर्च इंजन गूगल के मुकाबले ट्रैकिंग से मुक्त एक्सपीरियंस देते हैं। यूजर्स अब इस बात को लेकर ज्यादा सजग हो गए हैं कि उनका डेटा कहां जा रहा है और कैसे इस्तेमाल हो रहा है।
इसके अलावा गूगल का मोबाइल पर अनुभव भी पहले जैसा सहज नहीं रहा। फालतू सजेशन, वीडियो थंबनेल्स और शॉपिंग सेक्शन ने सर्च को बोझिल बना दिया है। दूसरी ओर AI-बेस्ड minimalist सर्च प्लेटफॉर्म जैसे Perplexity अधिक फोकस्ड और distraction-free अनुभव प्रदान करते हैं।
एक और बड़ी बात ये है कि गूगल यूजर के सवाल के पीछे की intent यानी मंशा को उतना अच्छी तरह नहीं समझ पा रहा, जितना AI बेस्ड मॉडल। यही वजह है कि लोग अब ChatGPT जैसे टूल्स से "सिर्फ जवाब" नहीं बल्कि contextual understanding भी चाहते हैं।
लेकिन भारत में दबदबा कायम
हालांकि, भारत में गूगल की पकड़ अब भी मजबूत है और इसका मार्केट शेयर करीब 97.75% है, लेकिन वैश्विक बदलाव को देखते हुए यह साफ है कि सर्च इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे चुका है। अगर गूगल समय रहते खुद को नहीं बदलेगा, तो भविष्य में इसकी बादशाहत वाकई खतरे में पड़ सकती है।


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