Japan : अब चंद्रमा और मंगल ग्रह पर दौड़ेगी बुलेट ट्रेन! देखें वीडियो
दुनिया को पहली बुलेट ट्रेन देने की बात करें तो जापान ने दी है, इसके बारे में सभी जानते हैं. वहीं अब जापान के साइंटिस्ट चंद्रमा और मंगल ग्रह (Moon and Mars) पर भी बुलेट ट्रेन दौड़ाने की योजना बना रहे हैं. जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी और काजिमा कंस्ट्रक्शन (Kyoto University and Kajima Construction) के रिसर्चर्स चंद्रमा और मंगल ग्रह पर आर्टिफिशियल अंतरिक्ष वातावरण (artificial space environment) बनाने की योजना बना रहे हैं. इसका मतलब है कि वहां इंसानों का एक खास क्षेत्र में निवास कर पाना मुमकिन होगा. साइंटिस्ट वहां यात्रा करने के लिए बुलेट ट्रेन की अवधारणा पर काम कर रहे हैं. इसके लिए 'हेक्सागोन स्पेस ट्रैक सिस्टम' (hexagon space track system) नाम के ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पर काम चल रहा है.

मंगल ग्रह को लेकर कई देशों के स्पेस एजेंसियां अपने मिशन तैयार कर रही हैं. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा वहां अपने अंतरिक्ष यानों के जरिए भी जीवन की संभावनाओं को तलाश रही है. लेकिन जापान के रिसर्चर एक कदम की आगे की सोचकर काम कर रहे हैं. प्रोजेक्ट के मुताबिक, 15 मीटर त्रिज्या वाला एक मिनी कैप्सूल पृथ्वी और चंद्रमा को जोड़ेगा. इसके बाद चंद्रमा और मंगल को जोड़ने के लिए 30 मीटर त्रिज्या का एक कैप्सूल इस्तेमाल किया जाएगा.
This project will completed by year 2050
रिसर्चर्स का मानना है कि यह कुछ साल की तैयारी नहीं है. इस प्रोजेक्ट में लंबा वक्त लगने वाला है. उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के साल 2050 तक पूरा होने की उम्मीद है.
Other countries have no such project
बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्योटो यूनिवर्सिटी के SIC ह्यूमन स्पेसोलॉजी सेंटर के निदेशक योसुके यामाशिकी ने कहा कि बाकी देशों की अंतरिक्ष विकास योजनाओं में इस तरह की कोई योजना नहीं है. हमारी योजना यह सुनिश्चित करती है कि भविष्य में इंसान अंतरिक्ष में जाने में सक्षम होंगे. प्रोजेक्ट में सहयोग कर रहे काजिमा कंस्ट्रक्शन के एक सीनियर रिसर्चर ताकुया ओनो ने कहा कि हम इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह भविष्य में इंसानों के लिए काफी उपयोगी होगा.

क्योंकि मंगल ग्रह का वातावरण इंसानों के रहने लायक नहीं है, इसलिए प्रोजेक्ट के तहत मंगल ग्रह पर एक ग्लास हैबिटेट बनाने की भी योजना है. यानी यह एक तरह का आवरण होगा, जिसके भीतर लोगों को पृथ्वी जैसा ही वायुमंडल मिलेगा. जो लोग इस हैबिटेट से बाहर निकलना चाहेंगे, उन्हें एक स्पेससूट पहनकर जाना होगा. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह सदी खत्म होने से पहले इंसान चंद्रमा और मंगल ग्रह पर आवाजाही करने लगेगा.
Artificial environment will be created
इस आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट के प्रोजेक्ट को 'द ग्लास' नाम जापानी शोधकर्ताओं ने दिया है. इसके तहत जापानी वैज्ञानिकों ने चांद पर एक 1,300 फीट की संरचना बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहे हैं. यह कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण के साथ एक शंक्वाकार जीवित संरचना होगी. जहां सार्वजनिक परिवहन का निर्माण किया जाएगा. चंद्रमा पर स्थित इस पर्यावरण को "Luna Glass" कहा जाएगा, जबकि मंगल ग्रह पर स्थित यह निवास स्थान "Mars Glass" कहलाएगा.
It will take 120 years to complete this project
प्रोजेक्ट की बात करें तो इसे पूरा होने में लगभग 120 साल लग सकते हैं. द इंडिपेंडेंट ने बताया कि इसके एक सरलीकृत्र संस्करण को 2050 तक पूरा करने की योजना है, जबकि इसे पूरी तरह सफल बनाने में 70 साल और लग सकते हैं.
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