कबाड़ मोबाइल में छिपा है सोना? फेंकने से पहले जान लें सच्चाई
स्मार्टफोन पुराना होते ही ज्यादातर लोग उसे कबाड़ में फेंकने की सोच लेते हैं या सस्ते में बेच देते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को एक बड़ी सच्चाई के बारे में पता होता है। गैजेट्स में
कीमती धातुएं जैसे सोना, चांदी और तांबा छिपा होता है? यही कारण है कि ई-वेस्ट को दुनिया की अर्बन माइन्स कहा जाता है।

हर स्मार्टफोन में छिपी कीमती धातुएं
एक रिसर्च के मुताबिक, 1 टन पुराने स्मार्टफोन से करीब 300 ग्राम तक सोना निकाला जा सकता है। जबकि इतनी ही मात्रा का सोना निकालने के लिए धरती से लगभग 80 टन सोने की खदानें खोदनी पड़ती हैं।
एक मोबाइल में औसतन 30-40 मिलीग्राम सोना होता है। इसके अलावा तांबा, एल्युमिनियम, लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ धातुएं (rare earth metals) भी मौजूद होती हैं।
क्यों छिपा है इसमें सोना?
मोबाइल और लैपटॉप की सर्किट बोर्ड्स और कनेक्टर्स में सोना इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह जंग नहीं खाता और बिजली को बेहतरीन तरीके से प्रवाहित करता है। यही वजह है कि टेक कंपनियां सोने को इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स का अहम हिस्सा मानती हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि क्या इस सोने को निकाला जा सकता है? तो ऐसा संभव नहीं है। क्योंकि यह बहुत कम मात्रा में होता है। कहने में यह बात ठीक है कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में सोना पाया जाता है, लेकिन उसे निकालना प्रैक्टिकल नहीं है।
ई-वेस्ट का बढ़ता पहाड़
संयुक्त राष्ट्र (UN) की Global E-Waste Monitor 2024 रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर साल लगभग 62 मिलियन टन ई-वेस्ट निकल रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-वेस्ट जनरेटर है।
इनमें से सिर्फ 20% ई-वेस्ट का ही वैज्ञानिक तरीके से रिसाइकल किया जाता है, बाकी या तो फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
फेंकने से पहले ध्यान रखें
- पुराने फोन को सीधे कबाड़ में न बेचें।
- किसी प्रमाणित ई-वेस्ट रिसाइक्लर या कंपनी के कलेक्शन सेंटर पर जमा करें।
- चाहें तो ट्रेड-इन प्रोग्राम का फायदा उठाकर नया फोन खरीदें।
- रिसाइक्लिंग से न सिर्फ पर्यावरण सेफ रहेगा बल्कि कीमती धातुएं भी बर्बाद नहीं होंगी।


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