Independence Day 2024 पर जानें ISRO की उपब्धियां, कैसे इसने तकनीकी क्षेत्र में दिया अपना योगदान
Independence Day 2024 पर ISRO की उपब्धियां: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसरो के अंतरिक्ष मिशनों ने न केवल भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित किया है, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनने और वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ाने में भी भरपूर योगदान दिया है।
इसके द्वारा लॉन्च की गई सैटेलाइट संचार, मौसम पूर्वानुमान, प्राकृतिक आपदा प्रंबधन और राष्ट्रीय सुरक्षा में सहायक साबित हुई हैं। इसरो की उपलब्धियों ने राष्ट्रीय गर्व को बढ़ाया है और भारत की वैश्विक स्थिति को भी मजबूत किया है। चलिए इस Independence Day 2024 पर ISRO की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर एक नजर डालते हैं।

ISRO की कैसे हुई शुरुआत
ISRO अंतरिक्ष में आत्मनिर्भता और टेक्नोलॉजी में बढ़ती एडवांसमेट के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। 1969 में स्थापित हुआ ISRO अपनी मामूली शुरुआत से बढ़कर दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक बन चुका है, जो कि अपने द्वारा किए जाने वाले अभिनव अंतरिक्ष मिशनों के लिए जाना जाता है।
The Indian Space Research Organisation की यात्रा डॉ. विक्रम साराभाई से शुरू हुई, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक (Father) माना जाता है। इस संगठन का गठन Independence day यानी 15 अगस्त 1969 को हुआ था । 1969 से लेकर 2024 तक ISRO ने कई उपलब्धिया हासिल की है।
मिशन और उपलब्धियां
ISRO का पहला उपग्रह (Satelite) आर्यभट्ट सोवियत संघ द्वारा 19 अप्रैल 1976 को लॉन्च किया गया था। इसके बाद सन् 1979 में ISRO के स्वदेश निर्मित कक्षीय रॉकेट का पहला परीक्षण किया गया था, जिसका नाम सेटेलाइट लॉन्च व्हिकल-3 (SLV-3) था। लेकिन SLV-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च 18 जुलाई 1980 को किया गया था। यह रोहिणी वन उपग्रह को ले गया था, जिसका लक्ष्य अंतरिक्ष में इस्तेमाल किए जा सकने वाले घटकों का परीक्षण करना था।
1984 में राकेश शर्मा ने 2 रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ सैल्यूट-7 पर उड़ान भरी थी। INSAT को 1998 में लॉन्च किया गया था। इसमें GSAT नामक उपग्रह भी शामिल था। संसाधन निगरानी और प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक भारतीय रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट भी लॉन्च की गई थी।
जानें चंद्रयान और मंगलयान के बारे में
ISRO की महत्वकाक्षाएं धरती की कक्षा से आगे तक फैली हुई है, जो चंद्रयान और मंगलयान मिशनों में परिणत हुई है। 2008 में लॉन्च किया गया चंद्रयान-1 भारत का पहला चंद्र परीक्षण था। इसने चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं के साक्ष्य की खोज करने के साथ ही कई अन्य जानकारी भी पेश की थी। चंद्रयान-1 को मिली सफलता के बाद सन् 2019 में चंद्रयान-2 को भी लॉन्च किया गया था, जिसका लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक सॉफ्ट लैंडिंग करना था। हालांकि लैंडर विक्रम सुरक्षित रूप से उतरने में विफल रहा, लेकिन मिशन का ऑर्बिटर मूल्यवान डेटा भेजना जारी रखता है।
लेकिन अगर सबसे ज्यादा सुर्खियों किसी ने बटोरी थी, वो था इसरो का 2014 का सफल मंगल मिशन (मंगलयान)। इस मिशन ने भारत को अपने पहले प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला पहला देश और ऐसा करने वाली चौथी अंतरिक्ष ऐजेंसी बना दिया था। इस मिशन की लागत-प्रभावशीलता के लिए काफी तारीफ की गई थी, जिसे अन्य देशों द्वारा इस तरह के मिशनों की लागत के एक अंश पर हासिल किया गया था।
ISRO की क्या है फ्यूचर प्लानिंग
इसरो की भविष्य की योजनाओं में Gaganyan मिशन शामिल है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना है। इसके साथ ही चंद्रयान-4 मिशन, शुक्र ऑर्बिट मिशन, मंगल ऑर्बिटर मिशन 2 (मंगलयान 2), शुक्रयान-1 मिशन, निसार मिशन आदि।
ISRO की इन उपलब्धियों ने न केवल भारत की टेक्नोलॉजी कैपिसिटी को आगे बढ़ाया है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दिया है। इस संगठन ने विभिन्न देशों के लिए कई उपग्रह लॉन्च किए है, जो कि भारत को सभी देशों के सामने डटकर खड़े होने के लिए मजबूती प्रदान करता है। इतना ही नहीं यह संगठन सस्ती और विश्वसनीय लॉन्च सेवाओं के लिए एक पसंदीदा भागीदार भी बन गया है।


Click it and Unblock the Notifications








