इंफोसिस के बारे में जानिए कुछ अनोखे फैक्‍ट्स

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    भारत में कुछ ही ऐसी आईटी कंपनियां हैं जो अंतराष्‍ट्रीय मार्केट में अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए हैं इनमें से इंफोसिस एक जाना माना नाम है। इंफोसिस भारत की दूसरी सबसे आईटी कंपनी है जो सबसे अधिक‍ रेवेन्‍यू अर्जित करती है। लेकिन काफी लोगों को इंफोसिस से जुड़ी कई बातों के बारे में पता नहीं। जैसे अभी भी कई लोग ये समझते हैं कि इंफोसिस मुम्‍बई बेस कंपनी है जबकि इंफोसिस बैंगलोर बेस कंपनी है। इसके अलावा कई ऐसे फैक्‍ट हैं जिनके बारे में आप सभी नहीं जानते होंगे।

    इंफोसिस को बनाने में 6 नहीं बल्‍कि 7 लोगों का हाथ था।
    इंफोसिस के पीछे 6 नहीं बल्‍कि 7 लोगों का दिमाग था, जिनमें नंदन निलेकानी , एनएसराघवन, गोपालकृष्णन, एस डी.शिबुलाल, के दिनेश और अशोक अरोड़ा, राघवन शामिल थे। जिनमें से अशोक अरोड़ा ने 1988 में इंफोसिस के शेयर को बेचकर यूनाइटेड स्‍टेट चले गए थे और वहां पर एक कंसलटेंट के रूप में काम करने लगे थे।

    7 लोगों से शुरु हुई कंपनी में अब सिर्फ 4 लोग बचे हैं
    इंफोसिस को शुरु करने में भले ही 7 लोगों का दिमाग हो लेकिन पिछले साल नंदन निलेकानी ने सरकार का नेशनल आईडेंटिटी प्रोग्राम ज्‍वाइन कर इंफोसिस को अलविदा कर दिया। इससे पहले एनएसराघवन, एनएसराघवन इंफोसिस को छोड़ चुके थे।

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    Has 7 not 6 founders

    इंफोसिस के पीछे 6 नहीं बल्‍कि 7 लोगों का दिमाग था, जिनमें नंदन निलेकानी , एनएसराघवन, गोपालकृष्णन, एस डी.शिबुलाल, के दिनेश और अशोक अरोड़ा, राघवन शामिल थे। जिनमें से अशोक अरोड़ा ने 1988 में इंफोसिस के शेयर को बेचकर यूनाइटेड स्‍टेट चले गए थे और वहां पर एक कंसलटेंट के रूप में काम करने लगे थे।

    Infosys founders now down to 4

    इंफोसिस को शुरु करने में भले ही 7 लोगों का दिमाग हो लेकिन पिछले साल नंदन निलेकानी ने सरकार का नेशनल आईडेंटिटी प्रोग्राम ज्‍वाइन कर इंफोसिस को अलविदा कर दिया। इससे पहले एनएसराघवन, एनएसराघवन इंफोसिस को छोड़ चुके थे।

    First office

    काफी कम लोगों को पता है इंफोसिस का हेड ऑफिस बैंगलोर में है, लेकिन सबसे पहला इंफोसिस का रजिर्स्‍टट ऑफिस मुंम्‍बई में खुला था जो एनएस राघवन के घर में था।, इसके बाद 1983 में कंपनी ने अपना हेडक्‍वॉटर बैंगलोर में बनाया, जबकि कंपनी का सबसे पहले इंटरनेशनल ऑफिस बोस्‍टन यूएस में था।

    No computer for first 2 years

    भले ही ये बात आपको थोड़ी हैरान कर देनी वाली लगे लेकिन इंफोसिस जब खुली थी तो कंपनी में एक भी कंप्‍यूटर नहीं था। 2 साल बाद 1981 में इंफोसिस में पहला कंप्‍यूटर आया था जिसका नाम डेटा जनरल 32 बिट MV8000 था।

    Got only 1% from Indian market

    2008 और 2009 में इंफोसिस के कुल रेवन्‍यू में से सिर्फ 1 प्रतिशत रेवन्‍यू भारतीय बाजार से आया था, इसके बाद कंपनी ने भारती बाजार में ओर अपना रुख किया।

    1989: The first crisis

    इंफोसिस को 1989 में काफी कठिन दौर से गुजरना पड़ा था, इंफोसिस ने तब पहली बार कर्ट सालमन एसोसिएट के साथ एक करार किया था लेकिन 1989 कंपनी को घाटे की वजह से काफी नुकसान हुआ।

    IPO

    1992 में इंफोसिस ने अपना पहला आईपीओ निकाला था जिसमें एक शेयर की कीमत 96 रुपए थी।

    First Indian company to list on Nasdaq

    1999 में इंफोसिस पहली ऐसी भारतीय कंपनी बनी जो अमेरिकन स्‍टॉक एक्‍सचेंज में लिस्‍टेड की गई थी। तब इंफोसिस का एक साल में 100 मिलियन डॉलर रेवेन्‍यू था।

    Crosses 1 lakh headcount mark

    पिछले साल इंफोसिस ने टीसीएस को पछाड़ते हुए 1 लाख कर्मचारियों का आकड़ा छुआ। अब इंफोसिस भारती की दूसरी सबसे ज्‍यादा कर्मचारियों वाली कंपनी बन चुकी है।


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    पहला ऑफिस
    काफी कम लोगों को पता है इंफोसिस का हेड ऑफिस बैंगलोर में है, लेकिन सबसे पहला इंफोसिस का रजिर्स्‍टट ऑफिस मुंम्‍बई में खुला था जो एनएस राघवन के घर में था।, इसके बाद 1983 में कंपनी ने अपना हेडक्‍वॉटर बैंगलोर में बनाया, जबकि कंपनी का सबसे पहले इंटरनेशनल ऑफिस बोस्‍टन यूएस में था।

    पहले 2 साल में कंपनी के पास कोई भी कंप्‍यूटर नहीं था
    भले ही ये बात आपको थोड़ी हैरान कर देनी वाली लगे लेकिन इंफोसिस जब खुली थी तो कंपनी में एक भी कंप्‍यूटर नहीं था। 2 साल बाद 1981 में इंफोसिस में पहला कंप्‍यूटर आया था जिसका नाम डेटा जनरल 32 बिट MV8000 था।

    भारतीय बाजार से सिर्फ 1 प्रतिशत रेवन्‍यू आया था
    2008 और 2009 में इंफोसिस के कुल रेवन्‍यू में से सिर्फ 1 प्रतिशत रेवन्‍यू भारतीय बाजार से आया था, इसके बाद कंपनी ने भारती बाजार में ओर अपना रुख किया।

    1989 में पहली क्राइसेस से गुजना पड़ा
    इंफोसिस को 1989 में काफी कठिन दौर से गुजरना पड़ा था, इंफोसिस ने तब पहली बार कर्ट सालमन एसोसिएट के साथ एक करार किया था लेकिन 1989 कंपनी को घाटे की वजह से काफी नुकसान हुआ।

    आईपीओ
    1992 में इंफोसिस ने अपना पहला आईपीओ निकाला था जिसमें एक शेयर की कीमत 96 रुपए थी।

    भारत की पहली कंपनी जो नासडाक में लिस्‍टेड है
    1999 में इंफोसिस पहली ऐसी भारतीय कंपनी बनी जो अमेरिकन स्‍टॉक एक्‍सचेंज में लिस्‍टेड की गई थी। तब इंफोसिस का एक साल में 100 मिलियन डॉलर रेवेन्‍यू था।

    1 लाख से ज्‍यादा कर्मचारी है इंफोसिस में 
    पिछले साल इंफोसिस ने टीसीएस को पछाड़ते हुए 1 लाख कर्मचारियों का आकड़ा छुआ। अब इंफोसिस भारती की दूसरी सबसे ज्‍यादा कर्मचारियों वाली कंपनी बन चुकी है।

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