Nvidia के दबदबे को मिलेगी चुनौती, Meta कर रहा बड़ी तैयारी, बनाएगा इन-हाउस चिप
Meta in-house-AI Chip: Meta लगातार अपनी टेक्नोलॉजी को बेहतर करने की दिशा में काम करता रहता है। इसी सिलसिले में हाल में आई रिपोर्ट में पता चला है कि Meta अपनी पहली इन-हाउस AI चिप की टेस्टिंग कर रहा है। बता दें कि Meta, Facebook, Instagram, और WhatsApp की पेरेंट कंपनी है।
यह कदम कंपनी के लिए कस्टम सिलिकॉन डेवलपमेंट की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कदम के साथ कंपनी Nvidia जैसे बाहरी सप्लायर पर निर्भरता को कम करना चाहती है। ऐसे में अगर कंपनी अपनी प्लानिंग में कामयाब हो जाती है तो Meta बड़े पैमाने पर इस AI चिप का प्रोडक्शन कर सकता है। आइए इसके बारे में जानते हैं।

Meta का स्ट्रेटजी
- Reuters की रिपोर्ट में पता चला है कि Meta अपने इस कस्टम AI चिप के डेवलपमेंट को अपने लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की लागत को कम करने की स्ट्रेटजी के हिसाब से देख रहा है।
- जैसा कि हम जानते हैं, Meta AI और मशीन लर्निंग में भारी निवेश कर रहा है, जिससे जुड़ी लागतों को कम करने के लिए कंपनी कस्टम हार्डवेयर डेवलप कर रही है।
- Meta ने 2025 के लिए अपनी अनुमानित लागत 114 बिलियन डॉलर से 119 बिलियन डॉलर (9.9 लाख करोड़ रुपये से 10 लाख करोड़ रुपये) के बीच रखी है, जिसमें से लगभग 65 बिलियन अमेरिकी डॉलर (5.6 लाख करोड़) सिर्फ AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जाएंगे।
AI चिप कैसे है बड़ा कदम?
- Meta द्वारा विकसित यह नया AI चिप एक डेडिकेटेड एक्सेलेरेटर है, जो पुराने GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) से कहीं बेहतर तरीके से AI ट्रेनिंग टास्क पूरा करेगा। इस चिप के इस्तेमाल से Meta का AI सिस्टम और बेहतर और तेज हो जाएगा।
- साथ ही कंपनी को चिप के लिए किसी एक्सटर्नल सप्लायर की जरूरत नहीं होगी। यानी कि कंपनी की लागत कम होने के साथ-साथ इसकी परफॉर्मेंस भी बेहतर होगी।
TSMC के साथ पार्टनरशिप
- Meta अपने नए AI चिप को डेवलप करने के लिए TSMC के साथ काम कर रहा है।
- कंपनी ने हाल ही में अपना पहला 'Tape-Out' पूरा किया है, जो किसी भी चिप को डिजाइन करने की दिशा में पहला कदम है। इसके बाद प्रोटोटाइप (Prototype) को डेवलप के लिए भेजा जाता है।
- कस्टम चिप को डेवलप करना एक मुश्किल काम है, क्योंकि इससे पहले भी Meta ने चिप प्रोजेक्ट पर काम किया था, जो सफल नहीं हो पाया था। इस कारण इसे बंद करना पड़ा था।
- हालांकि, Meta ने 2024 में एक AI Inference Chip पेश किया, जिसका उपयोग Facebook और Instagram पर कंटेंट सजेशन को ऑप्टिमाइज करने के लिए किया गया था।
- अब कंपनी 2026 तक अपनी AI कैपिसिटी को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे यह चिप जनरेटिव AI एप्लिकेशन- जैसे Meta AI चैटबॉट को भी सपोर्ट कर सके।
मार्केट पर क्या होगा असर
- अगर Meta अपने प्लान में कामयाब हो जाती है तो इससे Nvidia जैसी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
- आपको बता दें कि Meta अब भी Nvidia के सबसे बड़े कस्टमर्स में से एक है और अपने AI टेस्टिंग के लिए करोड़ों रुपये खर्च करता है।
- हालांकि, बढ़ते AI रिसर्च के चलते कंपनियां अब लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) के स्केलिंग की सीमाओं पर विचार कर रही हैं। इसलिए, Meta अपने हार्डवेयर सॉल्यूशन बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इससे AI सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
- ऐसे में अगर Meta की ये स्ट्रेटजी काम कर जाती है तो यह AI हार्डवेयर इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।


Click it and Unblock the Notifications








