नासा ने बनाई दुनिया की पहली उड़ने वाली लैब
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने तारों के अध्ययन के लिए एक बोइंग 747 विमान में आठ फुट व्यास तथा 17 टन वजनी एक दूरबीन लगाया है। स्टैटोस्फेरिक आब्जरवेटरी फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनोमी (एसओएफआईए) नामक यह दूरबीन खिसकने वाले दरवाजे के पीछे लगा है, जो आसमान में खुलता है। यह विमान 12 घंटे तक हवा में रह सकता है और इसकी उड़ान क्षमता 6,625 नॉटिकल मील है।
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नासा के अनुसार, "एसओएफआईए की ओर से उपलब्ध आंकड़े धरती व अंतरिक्ष में मौजूद अन्य संसाधनों के जरिए नहीं मिल सकते हैं। एसओएफआईए चूंकि सचल है, इसलिए यह सुपरनोवा और धूमकेतु जैसी अस्थायी आकाशीय घटना को बेहतर समझ सकता है। इस दूरबीन को जर्मन एरोस्पेस सेंटर की मदद से बनाया गया है, जिसका आसानी से मरम्मत किया जा सकता है।
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ये दुनिया की पहली ऐसी लैब है जो उड़ सकती है।
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नासा ने ग्रहों का अध्ययन करने के लिए बोइंग 747 जेटलाइनर में 17 टन और 8 फीट की त्रिज्या वाला टेलीस्कोप फिट किया है
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इस लैब में फिट किए गए टेलिस्कोप को सोफिया (स्टै्रटोस्फेरिक ऑर्ब्जवेट्री फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनॉमी) कहते हैं,
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नासा के मुताबिक, सोफिया से मिला डाटा अंतरिक्ष या पृथ्वी से किसी भी दूसरे तरीके से हासिल नहीं किया जा सकता।
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इस लैब को जर्मनी की मदद से तैयार किया गया है। जरूरत पड़ने पर इसे रिपेयर और फिर से प्रोग्र्राम किया जा सकता है।
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यह विमान 12 घंटे तक हवा में रह सकता है और इसकी उड़ान क्षमता 6,625 नॉटिकल मील है।
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नई लैब सुपरनोवा और धूमकेतु जैसी अस्थायी आकाशीय घटना को बेहतर समझ सकता है।
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ये दुनिया की पहली ऐसी लैब है जो उड़ सकती है।


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