Deepfake पर लगेगी लगाम! 1 नवंबर से लागू होंगे भारत के नए IT Rules 2025, सोशल मीडिया पर बढ़ेगी जवाबदेही
भारत में डिजिटल स्पेस अब पहले से कहीं ज्यादा निगरानी में आने वाला है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 22 अक्टूबर 2025 को Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 में बड़ा संशोधन किया है। यह बदलाव IT Rules (Amendment), 2025 के तहत किए गए हैं और 1 नवंबर 2025 से लागू होंगे।
सरकार का मकसद है, फेक, डीपफेक और अवैध ऑनलाइन कंटेंट पर कड़ी लगाम लगाना और जवाबदेही को ऊंचे स्तर तक ले जाना।

Joint Secretary और DIG देंगे 'टेकडाउन ऑर्डर'
पहले किसी भी पुलिस इंस्पेक्टर या निचले स्तर के अधिकारी द्वारा सोशल मीडिया या वेबसाइट से कंटेंट हटाने का आदेश जारी किया जा सकता था। लेकिन अब यह अधिकार केवल Joint Secretary (केंद्रीय मंत्रालयों में) या DIG रैंक (राज्य पुलिस में) के अधिकारियों के पास होगा।
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य है कि ऐसे मामलों में उच्च-स्तरीय निगरानी और जिम्मेदारी तय हो। उन्होंने कहा कि जब कोई आदेश इतने सीनियर स्तर से जारी होगा, तो सरकार की जवाबदेही भी बढ़ेगी। हर टेकडाउन ऑर्डर के साथ अब 'reasoned intimation' यानी स्पष्ट कारण दिया जाएगा।"
इसका अर्थ है कि अब कोई भी ऑनलाइन कंटेंट बिना स्पष्ट कारण बताए नहीं हटाया जाएगा - यह एक पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
Deepfake और Synthetic कंटेंट पर सख्त निगरानी
नए संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Deepfake कंटेंट और Synthetic Media को लेकर है। सरकार ने प्रस्तावित किया है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट को स्पष्ट रूप से "label" करना होगा ताकि यूज़र्स को पता चल सके कि कौन-सा कंटेंट असली है और कौन-सा आर्टिफिशियल तरीके से बनाया गया है।
इस प्रावधान से Deepfake वीडियो या फोटो के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी। मंत्री वैष्णव ने कहा कि लोग किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की छवि या आवाज़ का इस्तेमाल कर फेक वीडियो बना रहे हैं, जिससे समाज में गलतफहमियां और व्यक्तिगत नुकसान हो रहा है। अब ऐसे मामलों पर सख्त एक्शन होगा।
Social Media Platforms पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
संशोधित ड्राफ्ट में Social Media Intermediaries (SMIs) और Significant Social Media Intermediaries (SSMIs) दोनों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाली गई हैं।
अब इन प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी अवैध या भ्रामक कंटेंट को तुरंत फ्लैग किया जाए, डीपफेक या सिंथेटिक मीडिया की पहचान के लिए तकनीकी टूल्स लगाए जाएं और टेकडाउन ऑर्डर आने पर समयसीमा के भीतर कार्रवाई की जाए।
यह बदलाव Instagram, YouTube, X (Twitter), Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए सीधा संदेश है कि भारत अब AI-जनित कंटेंट और फेक मीडिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने जा रहा है।
AI Framework का हिस्सा बनेगा नया IT नियम
MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि ये संशोधन आने वाले AI Framework का भी हिस्सा होंगे, जिसे मंत्रालय जल्द जारी करेगा। इससे साफ है कि भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल कंटेंट रेगुलेशन को एकीकृत नीति के तहत लाने की तैयारी में है।
जनता से मांगे गए सुझाव
मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट संशोधन पर 6 नवंबर 2025 तक सार्वजनिक सुझाव मांगे हैं। इसका मतलब है कि नागरिक, तकनीकी विशेषज्ञ और डिजिटल प्लेटफॉर्म सभी इस पर अपनी राय भेज सकते हैं।
क्यों है यह बदलाव अहम?
डिजिटल युग में जहां AI-जनित डीपफेक्स, राजनीतिक फेक वीडियो और हेट कंटेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में सरकार का यह कदम एक "Digital Clean-up Drive" की दिशा में माना जा रहा है। यह न केवल सोशल मीडिया यूजर्स की प्राइवेसी की रक्षा करेगा बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही भी तय करेगा।
1 नवंबर 2025 से लागू होने वाले ये नए IT Rule Amendments भारत के डिजिटल भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं, जहां स्वतंत्रता और जिम्मेदारी, दोनों का संतुलन होगा। अब Deepfake बनाने वालों और फेक न्यूज़ फैलाने वालों के लिए रास्ता आसान नहीं रहेगा।


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