नॉर्थ कोरिया की चंद्रयान-2 पर नज़र ? इसरो के सिस्टम पर किया साइबर अटैक

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भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 पर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की नज़र है। ऐसे में इस मिशन से जुड़ी हर ख़बर करोड़ों लोगों की धड़कनें बढ़ा देती हैं। कुछ समय पहले विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने की ख़बर ने सबके विचलित कर दिया था। अब खबरें आ रही हैं कि नॉर्थ कोरिया भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस वक्त चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर उतारने की कोशिश कर रहा था, उस समय उत्तर कोरिया के साइबर हैकर्स इसरो पर साइबर हमला कर दिया।

नॉर्थ कोरिया की चंद्रयान-2 पर नज़र ? इसरो के सिस्टम पर किया साइबर अटैक

 

कैसे हुआ हमला?

चंद्रयान-2 मिशन

वहीं, फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो को सितंबर में ही इस हमले को लेकर चेतावनी दी गई थी। उस समय इसरो ने दावा किया था कि उनके संस्थान के सिस्टम को हैक करने की कोशिश नाकामयाब हुई है। लेकिन सितंबर में चंद्रयान-2 से संपर्क टूटने के बाद अंतरिक्ष अभियान को झटका ज़रूर लगा था।

नॉर्थ कोरिया के नियंत्रण में है हैकर्स

इस मामले पर अमेरिकी ऑफिसर्स का कहना है कि इस हमले को DTrack का इस्तेमाल करके अंजाम दिया गया है। यह एक प्रकार का मालवेयर होता है, जो हैकिंग ग्रुप लैजारस से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार लैजारस को उत्तर कोरिया सरकार कंट्रोल करती है। 18 भारतीय राज्यों में वित्तीय संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों में साइबर सिक्योरिटी फर्म कैस्परस्की की एक रिपोर्ट में मालवेयर का पता चला है।

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पहले भी हुआ है साइबर हमला

इस तरह साइबर हमला पहली बार नहीं हुआ है। बल्कि भारत के तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु रिएक्टर पर साइबर हमला हुआ था। माना जाता है कि उसे भी ऐसे ही मालवेयर से प्रभावित किया गया था। दक्षिण कोरिया के एक गैर लाभकारी खुफिया संगठन इशू मेकर्स लैब (आईएमएल) ने हाल ही में दावा किया था कि र्थ कोरिया के हैकर्स इस परमाणु रिएक्टर की टेक्नोलॉजी और डिजाइन्स को चुराना चाहते हैं और इसके लिए वे कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। रिएक्टर के अधिकारियों ने भी माना था कि मालवेयर का निशाना प्रशासकीय कंप्यूटर था।

 

चंद्रयान-2 की असफल लैंडिंग

आपको बता दें कि 7 सितंबर को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग होनी थी। लेकिन चंद्रमा पर लैंड करने से 2.1 किलोमीटर पहले ही लैंडर से संपर्क टूट गया था। उस वक्त इसरो ने अपने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें जारी करते हुए बताया था कि 7 सितंबर को लैंडर चांद की सतह से टकराया था यानि उसने चंद्रमा पर सॉफ्ट नहीं बल्कि हार्ड लैंडिंग की थी। अगर यह मिशन पूरी तरह से सफल होता तो भारत सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला दुनिया का चौथा देश और दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन जाता। हालांकि हम इस मिशन को पूरी तरह असफल नहीं कह सकते क्योंकि ये मिशन 98 फीसदी सफल रहा है।

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English summary
India's ambitious mission Chandrayaan-2 is the focus of not only India but the whole world. In such a situation, every news related to this mission increases the beats of crores of people. Some time ago, the news of losing contact with Vikram Lander distracted everyone. Now reports are coming that North Korea is trying to break into Indian Space Agency ISRO.

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