विमानों में टैंपर-प्रूफ ट्रैकिंग प्रणाली होनी चाहिए

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मलेशिया एयरलाइंस के लापता विमान की खोज जहां जारी है, वहीं विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि टेंपर-प्रूफ लोकेशन प्रणाली और उपग्रह आधारित ट्रैकिंग प्रणाली का उपयोग करऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है। सरकारी कंपनी भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण की संचार, नेविगेशन और सर्विलांस (सीएनएस) इकाई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "विमान और जमीन पर ऐसी कई नेविगेशन और ट्रैकिंग प्रणाली हैं, जिससे विमान की ताजा स्थिति का पता लगाया जा सकता है। ताजा घटना में ऐसा लगता है कि प्रणाली विमान से आने वाले सिग्नल कोपकड़ नहीं पाई।"

अधिकारी ने कहा, ऐसा तभी हुआ होगा, जब या ता विमान काफी नीचे गहराई में डूब गया हो या फिर प्रौद्योगिकी को अच्छी तरह से समझने वाला कोई व्यक्ति इस प्रणाली को बंद कर दिया हो। यदि विमान में फिट प्रणाली टेंपर प्रूफ होगी, तो इससे विमान का तो पता लगाया ही जा सकेगा, बल्कि विमान अपहरण रोकने में भी मदद मिलेगी। कुआलालंपुर से बीजिंग जाने वाली उड़ान संख्या एमएच 370 में 239 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे। आपात स्थिति में ब्लैक बॉक्स सिग्नल का उपयोग कर विमान का पता लगाया जाता है, लेकिन यदि विमान पानी में डूब जाए, तो ये सिग्नल काम नहीं आते।

विमानों में टैंपर-प्रूफ ट्रैकिंग प्रणाली होनी चाहिए

सीएनएस अधिकारी ने कहा, "इस वक्त यह निश्चित नहीं कहा जा सकता है कि विमान का वास्तव में क्या हुआ। अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को समुद्र के ऊपर से होकर उड़ान भरने वाले विमानों टैंपर-प्रूफ प्रणाली लगाया जाना अवश्यक बनाया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजक ने शनिवार को कहा था कि लापता विमान की संचार प्रणाली को किसी ने बंद कर दिया था। यह काम तब किया गया था, जब विमान मलेशिया के पूर्वी तक के ऊपर पहुंचा था।

सीएनएस के अधिकारियों ने कहा कि भारत उपग्रह आधारित लोकेशन प्रणाली गगन का विकास कर रहा है, जिसका उपयोग जमीन पर मौजूद ट्रैकिंग इकाई को विमान की स्थिति की जानकारी देने के लिए किया जा सकता है।

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