Independence Day के खास मौके पर जानें भारत कैसे बना डिजिटल क्षेत्र में एडवांस
भारत की डिजिटल क्रांति बदलाव की एक उल्लेखनीय कहानी को दर्शाती है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था, समाज और शासन को नया रूप और आकार दिया है। जैसा कि हम सब इस बार 78वां स्वतंत्रता दिवस यानी Independence Day मना रहे हैं, तो इस खास मौके पर हमें भारत में डिजिटल क्षेत्र में आए महत्वपूर्ण बदलावों को अवश्य जानना चाहिए।
डिजिटल क्रांति की जड़ें 1990 के दशक में देखने को मिली, लेकिन इसने 2000 के दशक में गति पकड़ी और 2010 के दशक में नीति, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के अभिसर द्वारा प्रेरित होकर देखने को मिली।

प्रारंभिक नींव
भारत की डिजिटल क्रांति के बीज 1980 और 1990 के दशक में नेशनल इनफॉर्मेटिक सेंटर (NIC) की स्थापना और सरकारी कार्यालयों में कम्प्यूटर की शुरुआत के साथ बोए गए थे। यह 1991 में आर्थिक उदारीकरण (Economic Liberlization) था, जिसने तेजी से टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए मंच तैयार किया।
उदारीकरण की नीतियों ने भारतीय अर्थवयवस्था के ग्लोबल मार्केट्स और इनवेस्टमेंट्स के लिए द्वार खोल दिए, जिसने बदले में IT इंडस्ट्री के विकास को बढ़ावा दिया। Infosys, Wipro और TCS जैसी ग्लोबल IT दिग्गजों के रूप में उभरने लगी, जिन्होंने टेक सेवी वर्कफॉर्स और एक्सपेडिंग डिजीटल इनफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी।
मोबाइल टेलीफोन का विकास
भारत के डिजिटल विकास की अगली महत्वपूर्ण छलांग 2000 के दशक की शुरुआत में मोबाइल टेलीफोन के विकास के साथ आई। किफायती मोबाइल फोन की शुरुआत और टेलीकम्युनिकेश नेटवर्क के विस्तार ने पूरे देश में मोबाइल फोन को सर्वव्यापी बना दिया। 1999 में भारत सरकार की नेशनल टेलीकम्युनिकेशन पॉलिसी ने इस क्षेत्र को प्राइवेट प्लेयर्स के लिए खोलकर एक बेहद अहम रोल निभाया, जिसकी वजह से प्रतिस्पर्धा, नवाचार को बढ़ावा मिला और लागत भी कम आई।
2000 दशक के अंत तक भारत मोबाइल फोन के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक बन गया था, जिसने मोबाइल फर्स्ट डिजिटल इकोसिस्टम के लिए एक मंच तैयार किया और भारत के विकास के लिए कई तत्वों को जन्म दिया।
इंटरनेट और डेटा बूम
भारत के डिजिटल यात्रा में एक नए युग की शुरुआत हुई, जिसने 2010 के दशक में 3G और 4G नेटवर्क को जन्म दिया। 2016 में रिलायंस जियो का लॉन्च एक महत्वपूर्ण पल के रूप में जाना जाता है, जिसमें भारत के लोगों के लिए कम दाम में कई सारी फ्री सर्विसेज की शुरुआत की गई थी। फ्री वॉयस कॉल और बेहद ही कम कीमत में डेटा की पेशकश करके Jio ने इंटरनेट एक्सेस को लोकतांत्रिक बनाया और लाखों भारतीयों को ऑनलाइन नेटवर्क से करने में सफलता हासिल की।
जियो की एंट्री से भारत में सोशल मिडिया और ई-कॉमर्स से लेकल ऑनलाइन बैंकिग एवं डिजिटल पेमेंट तक डिजिटल सर्विसेज के उपयोग में विस्फोट हुआ। इसके अलावा डेटा क्रांति ने भारतीय स्टार्टअप के विकास को बढ़ावा दिया, जिसके चलते दशक के अंत तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन इकोसिस्टम बन गया है। बता दें कि Jio का जलवा आज भी बरकरार है।
डिजिटल इंडिया पहल
भारत सरकार ने 2015 में डिजिटल इंडिया पहल की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य भारत को डिजिटल रूप में विकसित कर सशक्त समाज और ज्ञान के सागर में ढकेलना था। इस पहल में तीन चीजों पर अधिक ध्यान दिया गया, जो कि डिजीटल इनफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सर्विसेज और डिजिकल एजुकेशन थी।
इस पहल को लेकर भारत सरकार का लक्ष्य BharatNet जैसी स्कीम के साथ सभी 250,000 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ना था और डिजिटल पहचान के लिए Aadhaar System की शुरुआत करना था। इसके बाद एक बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली Aadhaar दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे परिष्कृत आई कार्यक्रम बन गया।
Aadhaar सिस्टम ने सरकारी सेवाओं और सब्सिडी को सीधे लाभार्थियों के बैंक अकाउंट्स में पहुंचाने में मदद की और भ्रष्टाचार को कम करने और दक्षता में सुधार करने में सक्षम बनाया।
डिजीटल पेमेंट सिस्टम का उदय
डिजीटल क्रांति का एक और महत्वपूर्ण घटक डिजीटल पेमेंट का उदय है, जिसे सरकार द्वारा कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था के लिए किए गए प्रयासों से बढ़ावा मिला। इसे सबसे ज्यादा बढ़ावा भारत में 2016 में हुई नोटबंदी से मिला है।
2016 में लॉन्च किए गए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भारत के ट्रांजेक्शन में मील के पत्थर के समान योगदान दिया। UPI ने डिजीटल पेमेंट को सरल, तेज और सभी के लिए आसान बना दिया। इसमें शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का भी नाम शामिल है, जिसने कैशलेस ट्राजेंक्शन को आसान बनाने के साथ इसमें तेजी से वृद्धि भी की है।
अगर हम ऐसा कहे कि डिजिटल पेमेंट, जो कि वर्तमान की एक बेसिक जरूरत का हिस्सा बन चुका है और लोग इस पर निर्भर हो गए हैं, तो इसमें शायद कुछ भी गलत नहीं होगा। यह निर्भरता इस बात का संकेत देती हैं कि डिजिटल पेमेंट ने कैसे भारत में अपने पैर पसारे हैं और लोगों की जरूरतों का ध्यान रखा है। आज भारत में हर कोई डिजीटल पेमेंट से परिचित है।
Conclusion
भारत की डिजिटल क्रांति एक लगातार आगे बढ़ती हुई यात्रा है, जिसका और अधिक विस्तार होना बाकी है। तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी और इनोवेशन इसका विशेषज्ञता है। बढ़ती टेक लवर्स पॉपुलेशन के साथ भारत डिजिटल युग में आगे बढ़ने के लिए तैयार है। साथ ही इसमें और अधिक संभावनाएं लाने के लिए नई-नई खोज करने के लिए भी तैयार है। भारत का डिजिटल युग लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है और निरतंर विकास को बढ़ावा दे रहा है।


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