Telegram Investment Scam 2025: ₹5000 कमाने की लालच बना 15 लाख गंवाने का कारण; कैसे रहे सेफ
डिजिटल युग में टरोजाना मुनाफे' का सपना कई लोगों को आकर्षित कर रहा है, लेकिन इसी लालच का फायदा उठा रहे हैं साइबर ठग। चंडीगढ़ के सेक्टर 14 के निवासी भानु (परिवर्तित नाम) के साथ ऐसा ही हुआ, जब एक टेलीग्राम संदेश ने उन्हें करोड़पति बनने के सपने दिखाए और नतीजा ₹15 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ।

टेलीग्राम पर आया "गोल्डन ऑफर"
3 जून को भानु को 'प्रशांत श्री' नामक एक व्यक्ति का टेलीग्राम मैसेज मिला। उस व्यक्ति ने दावा किया कि वह उन्हें एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए हर दिन ₹3,000 से ₹5,000 तक कमाने में मदद कर सकता है। बस ₹10,999 की शुरुआती इन्वेस्टमेंट करनी थी।
भानु ने यह रकम जमा की और कुछ घंटों में ही उनके अकाउंट में ₹15,000 का "मुनाफा" दिखाई दिया। यही छोटी-सी सफलता ठगों का पहला दांव था - विश्वास जीतने का तरीका।
'स्पेशल इवेंट' और लालच की अगली सीढ़ी
शुरुआती मुनाफे से खुश होकर भानु ने बड़ी रकम लगानी शुरू की। ठगों ने उन्हें "स्पेशल ट्रेडिंग इवेंट" का लालच दिया, जिसमें और ज्यादा कमाई का वादा था। अगले कुछ हफ्तों में भानु ने कुल ₹15.17 लाख कई किस्तों में भेज दिए।
जब उन्होंने मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो प्लेटफॉर्म ने कहा कि ₹2.44 लाख का "वेरिफिकेशन फीस" देना होगा ताकि ट्रांजैक्शन रिलीज़ हो सके। आखिरी उम्मीद के तौर पर भानु ने यह रकम भी भेज दी , लेकिन इसके बाद प्लेटफॉर्म और 'प्रशांत श्री' दोनों गायब हो गए।
ऐप, डैशबोर्ड, और वर्चुअल ग्राफ सभी फर्जी साबित हुए, सब कुछ एक मनोवैज्ञानिक खेल था, जिसमें लालच और भरोसा दोनों का इस्तेमाल हुआ।
अब जांच में जुटी चंडीगढ़ साइबर पुलिस
भानु ने सेक्टर 17 स्थित साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई है। फिलहाल पुलिस उन बैंक खातों और पेमेंट गेटवे को ट्रेस कर रही है, जिनसे ये ट्रांजैक्शन हुए। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि ठगों ने विदेशी नंबरों और VPN सर्वर के ज़रिए भारतीय यूजर्स को निशाना बनाया।
इसी तरह का एक केस हाल ही में हैदराबाद में सामने आया था, जहां एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से ₹1 करोड़ से ज्यादा की ठगी की गई। ठगों ने इंस्टाग्राम ऐड्स और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के ज़रिए नकली "प्रॉफिट स्क्रीनशॉट्स" दिखाकर भरोसा जीता था।
एक्सपर्ट्स की चेतावनी
- साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी ठगियां हमेशा एक ही पैटर्न पर चलती हैं।
- पहले छोटे-छोटे "पेवाउट्स" दिखाकर भरोसा जीता जाता है।
- फिर धीरे-धीरे इन्वेस्टमेंट बढ़ाई जाती है।
- और जब यूजर विदड्रॉ करने की कोशिश करता है, तो "वेरिफिकेशन फीस" के नाम पर लूटा जाता है।
- साइबर सेल ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या टेलीग्राम पर किसी भी "इन्वेस्टमेंट ऑफर" पर भरोसा न करें।
- अगर कोई संदेहास्पद मैसेज, ऐप या वेबसाइट दिखे तो तुरंत cybercrime.gov.in या 1930 हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें।
सोशल साइकोलॉजिकल वेपन
इस मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत में "डिजिटल इन्वेस्टमेंट स्कैम" अब पर्सनल फ्रॉड नहीं, बल्कि एक 'सोशल साइकोलॉजिकल वेपन' बन चुका है। यह सिर्फ पैसों की ठगी नहीं, बल्कि भरोसे की भी चोरी है, जहां यूजर को यह एहसास ही नहीं होता कि वह किसी जाल में फंस चुका है।


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