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Online Trading Scam: ट्रेडिंग स्कैम के जाल में क्यों फंस रहे भारतीय; जानिए कैसे रहे सिक्योर

Online Trading Scams in India: आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम्स देश में सबसे तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों में से एक बन चुके हैं। लोग ऐप्स और वेबसाइट्स पर भरोसा कर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। लेकिन अगर हम ध्यान से देखें, तो इन स्कैम्स का असली हथियार सिर्फ फेक वेबसाइट या फेक सेलिब्रिटी इमेज नहीं है, बल्कि 'सोशल प्रूफ प्रेशर' है, यानी दूसरों को कमाते देखकर खुद का भरोसा खो देना।

ऐसे में लोग पैसे कमाने के चक्कर ट्रेडिंग ऐप्स की तरफ बढ़ जाते हैं। हालांकि कुछ सही होते हैं, लेकिन कुछ आपको स्कैम कर सकते हैं। यहां हम जानेंगे कि स्कैमर्स लोगों को कैसे फंसाते हैं और इससे कैसे बच सकते हैं।

Online Trading Scam: ट्रेडिंग स्कैम के जाल में क्यों फंस रहे भारतीय

कैसे फंसाते हैं ये स्कैमर?

फेक ऐप्स और वेबसाइट्स

स्कैमर्स ऐसे प्रोफेशनल दिखने वाले ऐप्स और वेबसाइट्स बनाते हैं जो असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसी लगती हैं। ये प्लेटफॉर्म पहले कुछ समय तक छोटे-छोटे मुनाफे दिखाते हैं ताकि यूजर का भरोसा जीत सकें।

वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स का जाल

असली जाल यहां बिछता है। स्कैमर्स पीड़ितों को अलग-अलग ग्रुप्स में ऐड करते हैं। इन ग्रुप्स में पहले से मौजूद सदस्य असली लगते हैं, लेकिन वे सब स्कैमर्स की टीम का हिस्सा होते हैं। इससे लोग अलग-अलग मैसेज करते हैं। कोई लिखता है कि आज मैंने 5,000 रुपये लगाए और ₹10,000 मिले। वहीं दूसरा रिप्लाई करता है कि थैंक्यू, सर! आप की टिप्स कमाल की हैं। यह 'सोशल प्रूफ' आपको मानसिक दबाव में ला देता है कि "सब कमा रहे हैं, तो मैं क्यों नहीं?

फेक सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट्स

कई बार ऐसे ऐड में रतन टाटा, मुकेश अंबानी, या सचिन तेंदुलकर की तस्वीरें होती हैं, जिससे लोग मान लेते हैं कि यह प्लेटफॉर्म भरोसेमंद है।

हाई रिटर्न का लालच

शुरुआत में 5%-10% डेली रिटर्न का वादा किया जाता है, जो असल में नामुमकिन है। यूजर छोटे अमाउंट पर भरोसा कर लेता है और जब बड़ी रकम लगाता है, तो ऐप बंद हो जाता है या अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है।

लोग क्यों फंस जाते हैं?

सोशल प्रूफ प्रेशर: जब आप ग्रुप में दर्जनों मैसेज देखते हैं कि लोग आसानी से पैसे कमा रहे हैं, तो दिमाग लालच में आ जाता है।

फाइनेंशियल अवेयरनेस की कमी: कई लोग हाई रिटर्न और हाई रिस्क का संबंध नहीं समझते हैं।

डिजिटल लिटरेसी कम होना: लोग कम जानकरी के कारण ऐप की असलियत चेक नहीं करते हैं।

आसानी से कमाने की चाहत: पोस्ट-कोविड दौर में एक्स्ट्रा इनकम की चाहत ने स्कैम्स को बढ़ावा दिया है।

कैसे बचें ?

  • सिर्फ SEBI-रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म जैसे Zerodha, Groww या Upstox का इस्तेमाल करें।
  • प्लेस्टोर/ऐपस्टोर पर रिव्यू और डेवलपर इंफो चेक करें।
  • अनरीलिस्टिक रिटर्न पर भरोसा न करें।
  • अपना पर्सनल डेटा जैसे PAN, आधार या बैंक डिटेल्स शेयर न करें।
  • अगर फंस गए हैं, तुरंत cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।

ज्यादातर लोग इसलिए नहीं फंसते क्योंकि उन्हें ऐप की जानकारी नहीं होती, बल्कि इसलिए क्योंकि वे दूसरों को कमाते देख खुद लालच में आ जाते हैं। सोशल प्रूफ का यह प्रेशर आज के स्कैमर्स का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। ऑनलाइन ट्रेडिंग असली है, लेकिन सिर्फ नियमित और रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म्स पर। अगर आप लालच और सोशल प्रूफ के दबाव से बच गए, तो आप साइबर क्रिमिनल्स से हमेशा एक कदम आगे रहेंगे।

 
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