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Payal Gaming Deepfake Case: क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई, कैसे पहचानें डीपफेक वीडियो?

Payal Gaming Deepfake Case: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसे Payal Gaming से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। यह डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रहा है। इससे पहले Archita Phukan से जुड़े फर्जी डीपफेक वीडियो और तस्वीरें भी इंटरनेट पर तेजी से फैली थीं।

हैरानी की बात यह है कि AI और डीपफेक की थोड़ी-बहुत जानकारी रखने वाले लोग भी जानते हैं कि ये वीडियो नकली हैं, इसके बावजूद इन्हें धड़ल्ले से शेयर किया जाता है। असली चिंता इस बात की है कि ऐसे फर्जी वीडियो कितनी तेजी से वायरल होते हैं, Google Trends तक पहुंच जाते हैं और सुर्खियां बन जाते हैं- बिना यह सोचे कि इससे पीड़ित व्यक्ति पर क्या गुजरती होगी।

Payal Gaming Deepfake Case: क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई?
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AI का दुरुपयोग और नियमों की कमी

AI ने जहां लोगों को सशक्त बनाया है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज Instagram पेज, Telegram ग्रुप और कई वेबसाइट्स खुलेआम डीपफेक फोटो और वीडियो बनाने की सुविधा दे रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन पर कोई ठोस नियंत्रण या निगरानी नहीं है, जबकि ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

एक ऐसा समाज जो वायरल कंटेंट के पीछे भागता है चाहे वह मजाक के नाम पर हो या सिर्फ व्यूज के लिए वह अक्सर पीड़ित को ही कठघरे में खड़ा कर देता है। ऐसे में कई सारे सवाल खड़े होते हैं।

डीपफेक की शुरुआत कहां से हुई?

Deepfake शब्द पहली बार 2017 में Reddit पर सामने आया, जहां एक यूजर ने सेलेब्रिटीज के AI-जनरेटेड अश्लील वीडियो पोस्ट किए थे। यहीं से डीपफेक का काला अध्याय शुरू हुआ। इसके बाद यह ट्रेंड इतना बढ़ा कि आज कई वेबसाइट्स सिर्फ AI-जनरेटेड सेलेब्रिटी कंटेंट पर ही चल रही हैं। धीरे-धीरे इसका दायरा आम महिलाओं तक फैल गया, जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर मौजूद थीं।

डीपफेक से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े

Deeptrace Labs की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट पर मौजूद 96% डीपफेक वीडियो महिलाओं पर आधारित हैं, जिनमें उन्हें अश्लील कंटेंट में दिखाया गया है। Sensity की रिपोर्ट बताती है कि डीपफेक वीडियो की संख्या हर छह महीने में दोगुनी हो रही है।

Keepnet के अनुसार, हाई-क्वालिटी डीपफेक को पहचानने की इंसानी क्षमता सिर्फ 24.5% है। Cornell University की रिसर्च के मुताबिक, न्यूडिफायर ऐप्स एक मिलियन से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुके हैं।

भारत में कानून और हकीकत

भारत में डीपफेक एक तेजी से फैलता खतरा बन चुका है। बड़ी आबादी के पास स्मार्टफोन तो हैं, लेकिन इंटरनेट और AI की समझ बेहद सीमित है। मौजूदा कानून अक्सर अपराध होने के बाद कार्रवाई करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि उस प्लेटफॉर्म या सोर्स पर कार्रवाई क्यों नहीं होती, जहां से यह अपराध शुरू होता है?

डीपफेक वीडियो कैसे पहचानें?

  1. चेहरे और शरीर का असामान्य तालमेल
  2. कान, बालों की लाइन या आंखों की अजीब हरकत
  3. वीडियो में चेहरे का धुंधला या कम रेजॉल्यूशन
  4. फ्रेम बदलते समय चेहरे का मोर्फ होना

इसके अलावा आप Reality Defender, Deepware Scanner, Hive AI Detection और Microsoft Video Authenticator जैसे टूल्स की मदद से भी डीपफेक की पहचान कर सकते हैं।

 
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