केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट से कहा, पबजी गेम को पूरी तरह से बैन करना मुश्किल
पबजी गेम की वजह से पूरे देश में काफी महीनों से विवाद चल रह है। देशभर के काफी सारे संस्थानों की मांग है कि इस गेम को बैन करना चाहिए क्योंकि इस गेम की वजह से बच्चों और युवाओं पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों और किशोर अवस्था वाले बच्चों की मानसिकता पर बुरा असर पड़ रहा है।

इसके अलावा देशभर के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी ख़बरें आई कि इस गेम को ना खेल पाने की वजह से कुछ बच्चें इतने बेताब हो गए कि किसी ने आत्महत्या कर ली, किसी ने अपने ही घर में चोरी कर ली, किसी ने खेल में मग्न होने के कारण पानी की जगह एसिड पी लिया। इस तरह की कई दुखद ख़बरे पूरे देश से आ रही है। इस वजह से इस गेम को बैन करने की मांग बढ़ गई है।
पबजी गेम को बैन करना मुश्किल: केंद्र सरकार
पबजी के बुरे प्रभाव को देखते हुए कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में बोलते हुए केंद्र सरकार को कहा था कि इस गेम का सरकार रिव्यू करें और देखे कि इस को प्रोवाइड करवाने वाले प्रोवाइडर के लिए गाइडलाइन्स की जरूर है या नहीं है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के एक रिपोर्ट के मुताबिक अब केंद्र सरकार ने इस बारे में जवाब देते हुए कोर्ट से कहा है कि पबजी गेम को पूरी तरह से बैन करना बेहद मुश्किल है। केंद्र सरकार का कहना है कि इस गेम के बुरे प्रभाव से बचने के लिए माता-पिता की जागरुकता ज्यादा जरूरी है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिया आदेश
आपको बता दें कि महाराष्ट्र के एक 11 साल के बच्चे ने कोर्ट में एक याचिका दायर करके इस गेम को बैन कराने की मांग की थी। उस बच्चे ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखकर इस गेम के बुरे प्रभाव के बारे में बताया था और इसे बैन करने की मांग की थी।
बच्चे की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस गेम का रिव्यू करने के लिए कहा था। ये आदेश बॉम्बे हाईकोर्ड की चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस नितिन जामदार के बेंच द्वारा दिया गया था। कोर्ट ने सरकार को पबजी का स्टैंड रिकॉर्ड करने के लिए भी एक एफिडेविट फाइल करने के लिए कहा है।


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