रेडियो ने फेलिन के दौरान बचाई जान

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फेलिन तूफान के ओडिशा में करीब 14 साल बाद वापस लौटने से पहले 55 वर्षीय गजेंद्र जेना ने ताजा जानकारी के लिए अपना रेडियो लगातार चालू रखा था। रेडियो पर जैसे ही यह खबर प्रसारित हुई कि तटीय क्षेत्र को खाली करना है, उन्होंने चूड़ा (पोहा), चीनी, जरूरी कपड़े, पैसे और अपना रेडियो सेट जमा किया और पत्नी तथा दो बच्चों के साथ राहत शिविर में चले गए। जेना ने कहा कि रेडियो बुलेटिन में समुद्र तट से पांच किलोमीटर अंदर तक कमजोर मकानों, फूस के घरों या एसबेस्टस की छत वाले घरों में रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की

चेतावनी दी गई थी।तट से करीब दो किलोमीटर अंदर अपने क्षतिग्रस्त घर के पास बैठे हुए जेना ने कहा, "हम अपने क्षतिग्रस्त घर को वापस बना लेंगे, लेकिन भगवान का शुक्र है कि हमारी जान बच गई। रेडियो से ही हमें खतरे की सूचना मिली। तूफान से उनके मकान का एसबेस्टस का छत उड़ गया और दोनों कमरे नष्ट हो गए। वहां सिर्फ कुछ टूटी-फूटी ईंटे ही पड़ी थी। तूफान के गुजरने के एक दिन बाद जेना अपने घर के पास पहुंचे हैं। यही हाल क्षेत्र में ऐसे हजारों घरों का है। सिर्फ जेना ही नहीं रेडियो ने हजारों लोगों की जान तूफान से बचा ली। राज्य में गंजम जिले के गोपालपुर में 12 अक्टूबर की रात को तूफान पहुंचा। उसके बाद भयंकर बारिश हुई और बाढ़ आ गई।

रेडियो ने फेलिन के दौरान बचाई जान

तूफान से करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। लेकिन जान का उतना नुकसान नहीं हुआ है, जितना 1999 के तूफान में हुआ था। तब 10 हजार मौते हो गई थीं। ताजा तूफान से अब तक सिर्फ 44 लोगों के मरने की खबर है। कम मौत होने का कारण यह है कि तूफान से पहले लाखों लोगों को प्रभावित क्षेत्र से हटा लिया गया था। आपदा प्रबंधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अधिकारियों ने लोगों को क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन रेडियो और मोबाइल फोन ने बड़ी भूमिका निभाई। भुवनेश्वर में फिलिप्स रेडियो बेचने वाले 'टाइम्स एंड साउंड' के मालिक अरुण कुमार सुबुद्धि ने कहा कि पहली चेतावनी के बाद एक घंटे के भीतर उनके 600 रेडियो बिक गए।

तीन दिन बाद भी लोग रेडिया खोज रहे थे और उन्होंने सौ रेडियो बेची। रेडियो के अलावा मोबाइल फोन ने भी लोगों को बचाने में बड़ी भूमिका निभाई। राज्य में मोबाइल फोन की विशाल उपभोक्ता संख्या है। बीएसएनएल के ओडिशा सर्किल के महाप्रबंधक बलराम पाल ने कहा कि कंपनी ने 11 और 12 अक्टूबर को मुख्यत: तटीय क्षेत्रों के 15 लाख उपभोक्ताओं को चेतावनी वाले एसएमएस भेजे। भुवनेश्वर स्थित मौसम कार्यालय के निदेशक एस.सी. साहू ने भी कहा कि उन्होंने करीब 150 प्रमुख अधिकारियों को चेतावनी वाले एसएमएस भेजे।

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