रिलायंस कम्यूनिकेशन कंपनी अब टेलिकॉम क्षेत्र से हटकर रियल एस्टेट में करेगी कारोबार
अनिल अंबानी की रिलायंस कम्यूनिकेशन (RCom,आर-कॉम) कंपनी ने टेलिकॉम बिजनेस से निकलने की घोषणा कर दी है। किसी जमाने में बाजार में बाकी कंपनियों को टेलिकॉम बिजनेस का पाठ पढ़ाने वाली कंपनी ने खुद ही अपने कदम पीछे ले लिए हैं। जिसका सबसे बढ़ा कारण हैं कंपनी के ऊपर आई आर्थिक तंगी है। बताया जा रहा है कि अब RCom कंपनी रियल एस्टेट कारोबार पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी।

कर्ज में कैसे डूबी कंपनी
2002 के समय जब मोबाइल फोन सभी के लिए एक लग्जरी डिवाइस माना जाता था। तब रिलायंस कम्युनिकेशंस एकमात्र ऐसी कंपनी थी। जिसने महज 500 रुपए में लोगों को मोबाइल की सुविधा उपलब्ध कराके इंडस्ट्री की सूरत बदल दी थी। कॉम्पिटिशन के बढ़ने के साथ-साथ सस्ती कॉल दरें, अट्रैक्टिव ऑफर्स देकर इंडस्ट्री में नए बिजनेस मॉडल की शुरुआत की। जिस मॉडल को बाकी टेलिकॉम कंपनियों ने भी अपनाया।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि गलत एक्सपेंशन प्लान की वजह से कंपनी काफी परेशानी में पड़ गई थी। जिसके साथ कंपनी पर कर्ज बढ़ता गया। जो कंपनी चुका नहीं पाई। वहीं, बाद में जब टेलिकॉम इंडस्ट्री में रिलायंस जियो के आने के बाद प्राइसिंग वार शुरू हुआ, तो कैश न होने से आर-कॉम इस प्रतियोगिता में टिकी नहीं रह पाई। इसी वजह से वह दूसरी बड़ी कंपनियों से पीछे होती गई। यही कारण है कि सब्सक्राइबर्स के मामले में टॉप पर रहने वाली कंपनी आज टॉप 5 की लिस्ट में भी शामिल नहीं है।
अब क्या करेगी RCOM
आरकॉम की 14वीं वार्षिक आम बैठक में अंबानी ने शेयरधारकों को बताया कि आरकॉम के लिए अपने 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज का समाधान करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि हमने फैसला किया है कि टेलिकॉम क्षेत्र में अब आगे काम नहीं करेंगे। यह फैसला बहुत सी अन्य कंपनियों ने भी किया है। हम मोबाइल क्षेत्र से निकल रहे हैं और रियल एस्टेट के कारोबार की और अपना कदम रखेंगे।
भविष्य में रिलायंस रियल्टी इस कंपनी के विकास का इंजन होगा। देश की आर्थिक राजधानी के बाहरी हिस्से में 133 एकड़ के भूखंड पर बने धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (डीएकेसी) की ओर इशारा करते हुए अंबानी ने कहा कि आरकॉम के भूतपूर्व मुख्यालय के पास रियल एस्टेट क्षेत्र के भारी अवसर हैं। वहीं आरकॉम पर चीनी बैंक समेत 38 कर्जदारों के 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। जिसे कंपनी स्ट्रेटजिक डेट रिस्ट्रक्चरिंग (एसडीआर) प्रक्रिया के माध्यम से चुकाएगी।


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