सिलिकॉन वैली VS आईटी हब बेंगलुरु और हैदराबाद
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सिलिकॉन वैली में आईटी के बड़े दिग्गजों के समक्ष डिजिटल इंडिया को तेज करने का पैगाम दिया तो वहीं यह भी घोषणा की कि सोशल मीडिया में दुनिया बदलने की क्षमता है। उन्होंने इस काम में सहयोग की अपेक्षा जताई। आपको बता दें कि सिलिकॉन वैली को हिंदुस्तान के प्रमुख महानगर बेंगलुरु और हैदराबाद टक्कर दे रहें हैं।
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अगर हम इन दोनों की तुलना करें तो पाएंगे कि हमारा इन महानगरों का पक्ष सिलिकाॅन वैली पर भारी दिखाई देता हैं। इसे आंकड़ों की नजर से देखने का प्रयास करते हैं। सिलिकॉन वैली में मात्र 15 लाख आईटी प्रोफेशनल्स हैं तो हमारे देश के इन दोनों महानगरो बेंगलुरु (लगभग 13 लाख) और हैदराबाद (4 लाख से अधिक) आईटी प्रोफेशनल्स हैं। इसमें भी बेंगलुरु सन् 2020 तक 20 लाख आईटी प्रोफेशनल का हब बन चुका होगा। आज हमारे देश का मध्यमस्तरीय आईटी मैनेजर औसत तनख्वाह लगभग 28 लाख रुपए तक पा रहा है।
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भारत की सिलिकन वैली-बेंगलुरु
बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली या इंटलेक्चुअल कैपिटल कहा जाए तो गलत नहीं होगा। एस आर पाटिल (आईटी मंत्री, कर्नाटक ) के अनुसार ‘बेंगलुरु एशिया की सिलिकॉन वैली व पृथ्वी का दूसरा बड़ा टेक्निकल क्लस्टर है।' गत पांच वर्षों से हमारे देश का आईटी एक्सपोर्ट में 34 प्रतिशत बेंगलुरु का होता है। भारतीय उद्योग का विकास 2014-15 में जहां 12 प्रतिशत रहा वहीं बेंगलुरु की इंडस्ट्रीज की ग्रोथ 14 फीसदी रही। बेंगलुरु में 1995 में पहला सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क बना। इस महानगर में 60 हजार पीएचडी पूरी की गईं जोकि देश में एक रिकॉर्ड है। हरीश बिजूर (आईटी कंसल्टेंट) की माने तो बेंगलुरु अपने सबसे बड़े तकनीकी स्टे्टस पर पहुंच गया है। अब विश्व की बहुत सारी सॉफ्टवेयर समस्याओं का समाधान है यह शहर। बेंगलुरु स्टार्टअप सिटी 714 स्क्वेयर कि.मी. में बसी है। इसमें 5400 से भी अधिक स्टार्टअप हैं।
के.एस विश्वनाथन (वाइस प्रेसिडेंट, इंडस्ट्री इनीशिएटिव, नैसकॉम) के अनुसार आंत्रप्रेन्योर, सरकार और एजुकेशन मिलकर आईटी का इकोसिस्टम तैयार करती हैं और इसी ने बेंगलुरु को आईटी हब बना दिया है। मोहनदास पइ (पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर, इंफोसिस ) बेगलुरु को देश का आर्थिक इंजन मानते हैं। सारे देश की आईटी कंपनियां में 35 फीसदी बेंगलुरु में हैं। विश्वनाथन इसे ही शहर का टेक्निकल ट्रांसफॉर्मेशन मानते हैं। लिंक्डइन द्वारा किए गए अपने 30 करोड़ से अधिक प्रोफेशनल्स की प्रोफाइल स्टडी से यह बात सामने आई है कि गत वर्ष विश्व से 44 प्रतिशत सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर बेंगलुरु आए जबकि अमेरिका की सिलिकॉन वैली पहुंचने वाले प्रोग्रामर्स की संख्या 31 प्रतिशत ही थी।
हैदराबाद भी बढ़ रहा है पूरी तेजी से
आंकड़ों को देखें तो हम पाएंगे कि हैदराबाद भी पूरी तेजी से आईटी हब बनने की दिशा में अग्रसर है। इस वर्ष इस महानगर में युवाओं को आईटी कंपनियों ने 50 हजार नए रोजगार उपलब्ध करवाए। व्यापार में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हैदराबाद की आईटी कंपनियों का कुल कारोबार 75 हजार करोड़ व एक्सपोर्ट का 64 हजार करोड़ रुपए है। टीसीएस और इंफोसिस अपने कर्मचारियों की संख्या को डबल करने की योजना बना रही हैं। नासकॉम ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2025 तक यह तीन लाख करोड़ (50 अरब डॉलर) से ज्यादा हो जाएगा। नरसिंम्हा राव (सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, इंफोसिस) की माने तो व्यापार लिए तीन चीजों की आवश्यकता पड़ती है-टैलेंट, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर व सरकार का सहयोग।
यह तीनों पिछले 15 सालों से हमें मिल रहे हैं। जयेश रंजन (सचिव, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, तेलंगाना ) की मानें तो सिलिकॉन वैली विश्व में अग्रणी तीन वजह से है। विश्व की अग्रणी कंपनी, मैन पावर और बहुत सारे नये प्रयोग (इनोवेशन)। हम वही हैदराबाद में दे रहे हैं। हम बेंगलुरु को पीछे नहीं छोड़ सकते पर इनोवेशन में देश का हब हैदराबाद बने यह हम अवश्य चाहते हैं। प्रोडक्ट और सर्विस के साथ ही भविष्य के लिए हम इंडस्ट्री को पांच क्षेत्रों में आगे ले जाना चाहते हैं। गेमिंग-एनिमेशन के क्षेत्र में जिसमें फिल्म बनाना और वीडियोगेम शामिल होगा। डेटा एनालिटिक्स, फोटोनिक्स, सायबर सिक्योरिटी और क्लाउड कंप्यूटिंग में जरूर कार्य करेंगे। अगले तीन वर्ष में रोजगार की संख्या 10 लाख करने की कोशिश है।
(सभी आंकड़े समाचार-पत्रों में प्रकाशित हुए हैं)


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