Starlink को मिला ग्रीन सिग्नल, लेकिन लॉन्च से पहले खड़ी हैं कई मुश्किलें!
भारत में Elon Musk की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकार ने पुष्टि की है कि Starlink ने दो अहम रेगुलेटरी पड़ाव पार कर लिए हैं, लेकिन अभी भी इसकी भारत में कमर्शियल लॉन्चिंग से पहले कुछ जरूरी औपचारिकताएं बाकी हैं।
Digit को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने Starlink की लाइसेंसिंग प्रक्रिया और आगामी चुनौतियों की जानकारी साझा की। आइए जानते हैं पूरी डिटेल।

अभी पार करनी हैं कई बाधाएं
सिंधिया ने बताया कि Starlink को जून 2025 में यूनिफाइड लाइसेंस (UL) मिल चुका है, जो भारत में टेलीकॉम सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी है। इसके अलावा, जुलाई में कंपनी को IN-SPACe से मंजूरी भी प्राप्त हो गई है।
- हालांकि, सर्विस शुरू करने से पहले कंपनी को अब भी चार से पांच जरूरी चरणों को पूरा करना होगा।
- Starlink को अपने सैटकॉम गेटवे के लिए मंजूरी लेनी होगी।
- उन्हें देश में अपने Points of Presence (PoPs) तय करने होंगे।
उन्हें स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट की आवश्यकता होगी। साथ ही, जो नेटवर्किंग उपकरण वे भारत में स्थापित करने जा रहे हैं, उनके लिए भी लाइसेंस लेना होगा। जब ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी, तब कंपनी भारत में अपना कमर्शियल संचालन शुरू कर सकेगी।
SATCOM है आज की जरूरत
सिंधिया ने कहा कि सैटकॉम अब भविष्य की नहीं, बल्कि आज की तकनीक बन चुकी है। भारत को अब टेक्नोलॉजी फॉलोवर से लीडर बनने की दिशा में ऐसे अत्याधुनिक सिस्टम अपनाने होंगे।
उन्होंने बताया कि अब तक तीन कंपनियों को LIC-ES लाइसेंस दिया गया है - Jio, OneWeb और अब Starlink को। संचार मंत्री ने कहा कि हमारा मिशन है कि देश में हर नई तकनीक को लाया जाए, ताकि ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलें और एक मुकाबले का माहौल बने।
Starlink की भारत में एंट्री से दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में तेज इंटरनेट पहुंचने की उम्मीद है, जिससे डिजिटल समावेश को बढ़ावा मिलेगा।


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