Starlink की भारत में एंट्री जल्द: एलन मस्क बोले- सेवा के लिए तैयार, 5 पॉइंट में जानें इनसाइड स्टोरी
एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink के भारत में लॉन्च होने का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। मस्क के एक हालिया बयान और सरकार के साथ चल रही बातचीत ने इस उम्मीद को और बढ़ा दिया है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और स्टारलिंक की टीम के बीच हुई बैठकों से संकेत मिले हैं कि रेगुलेटरी मंजूरी का सूखा जल्द खत्म हो सकता है। यहां 5 पॉइंट्स में जानें अब तक क्या-क्या हुआ और भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग कितनी करीब है।
1. एलन मस्क ने दिखाई हरी झंडी
स्टारलिंक एक बार फिर चर्चा में है और वजह है एलन मस्क का एक ट्वीट। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने लिखा, स्टारलिंक के साथ भारत की सेवा करने के लिए उत्सुक हूं (Looking forward to serving India with @Starlink)।" भले ही यह संदेश छोटा था, लेकिन ऐसे समय में आया है जब मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जो बताता है कि भारत उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।
2. हाई-लेवल मीटिंग से बढ़ी उम्मीदें
हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नई दिल्ली में स्टारलिंक की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रायर से मुलाकात की। सिंधिया ने बताया कि यह बैठक ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को पाने में सैटेलाइट टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभाएगी।
3. ग्रामीण भारत के लिए गेमचेंजर
निखिल कामथ के साथ एक पॉडकास्ट में एलन मस्क ने स्पष्ट किया कि स्टारलिंक मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों के लिए है, न कि घनी आबादी वाले शहरों के लिए। उन्होंने कहा भौतिक विज्ञान यहां हमारे पक्ष में नहीं है। स्टारलिंक के लिए घनी आबादी वाले शहरों में सबको सेवा देना संभव नहीं है। मस्क के अनुसार, शहरों में यह सेवा केवल 1-2% लोगों को ही मिल पाएगी, लेकिन उन गांवों और कस्बों के लिए वरदान साबित होगी जहां ब्रॉडबैंड नेटवर्क नहीं पहुंच पाता।
4. वेबसाइट पर कीमतें लीक?
हाल ही में स्टारलिंक की वेबसाइट पर भारत के लिए कीमतें दिखाई देने लगी थीं, जिसमें महीने का किराया 8,600 रुपये और हार्डवेयर की कीमत 34,000 रुपये बताई गई थी। यह खबर आग की तरह फैली, लेकिन कंपनी ने तुरंत सफाई दी। लॉरेन ड्रायर ने बताया कि यह तकनीकी गलती से हुआ था और वे आंकड़े केवल डमी टेस्ट डेटा थे, असली कीमतें नहीं। फिलहाल सबका ध्यान कीमतों से ज्यादा लाइसेंस मिलने पर है।
5. फाइनल मंजूरी का इंतजार
तमाम तैयारियों के बावजूद स्टारलिंक के अवेलेबिलिटी मैप पर भारत अभी भी पेंडिंग रेगुलेटरी अप्रूवल दिखा रहा है। हालांकि, इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में प्रक्रिया काफी आगे बढ़ी है। ड्रायर ने भी संकेत दिया कि उनकी टीम अब बस अंतिम सरकारी मुहर का इंतजार कर रही है ताकि भारत में सर्विस और वेबसाइट को आधिकारिक तौर पर शुरू किया जा सके।


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