Starlink के लॉन्च में देरी क्यों? क्या भारत के लोग नहीं ले पाएंगे फास्ट इंटरनेट का मजा!
Starlink Launch Delay in India: लंबे वक्त से स्टारलिंक (Starlink) के भारत में लॉन्च किए जाने की खबरें चल रही हैं। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स वर्तमान में कई देशों में सर्विस प्रोवाइड करा रही है। हालांकि, भारत में इसके लॉन्च में देरी हो रही है। इसकी वजह सख्त टेलीकॉम नियम हैं। भारत में इस सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की शुरुआत से पहले, दूरसंचार विभाग (DoT) ने सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए 29 से 30 नई सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।
इन नए नियमों का उद्देश्य न केवल नागरिकों के डेटा को सुरक्षित रखना है, बल्कि देश की सीमाओं और संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी संभावित खतरे को रोकना भी है। फिलहाल विभाग ने यह कदम पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन को ध्यान में रखते हुए उठाया है।

किन कंपनियों पर लागू होंगे ये नियम?
ये नए सिक्योरिटी क्राइटेरिया न केवल पहले से लाइसेंस प्राप्त कंपनियों जैसे Airtel OneWeb और Jio SES पर लागू होंगे, बल्कि Amazon Kuiper और Elon Musk की Starlink जैसी कंपनियां जो अभी लाइसेंस प्रोसेस में हैं, उन पर भी लागू होंगे। यह गाइडलाइन लाइसेंस प्राप्त करने और सर्विस ऑपरेशन के लिए बहुत जरूरी होंगे। आइए जानते हैं कि मेन सुरक्षा शर्तें क्या हैं?
वेबसाइट ब्लॉकिंग और मेटाडेटा कलेक्शन
सर्विस प्रोवाइडर्स को भारत के कानूनों के अनुसार वेबसाइट ब्लॉक करने, यूजर के मेटाडेटा कलेक्ट करने और वैलिड इंटरसेप्शन की सुविधा देनी होगी।
यूजर टर्मिनल वेरिफिकेशन
नए नियमों के हिसाब से केवल रजिस्टर्ड डिवाइस ही भारत में सैटेलाइट सर्विस का उपयोग कर सकेंगे। विदेशी टर्मिनलों को विशेष रजिस्ट्रेशन प्रोसेस से गुजरना होगा।
रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग
कंपनियों को यूजर टर्मिनल की सही लोकेशन सुरक्षा एजेंसियों की मांग पर उपलब्ध करानी होगी, चाहे वे स्टेबल या मोबाइल कनेक्शन हों।
डेटा भारत के बाहर नहीं जाएगा
इसके साथ ही सभी सर्विस प्रोवाइडर्स को अंडरटेकिंग देना होगा कि भारतीय यूजर का डेटा भारत के बाहर स्थित किसी सर्वर पर नहीं भेजा जाएगा।
रिस्ट्रिक्टेड एरिया प्रोटोकॉल
जब कोई टर्मिनल किसी प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश करेगा, तो नेटवर्क एक्सेस अपने आप बंद हो जाएगा।
बॉर्डर सर्विलांस जोन
सभी सर्विस प्रोवाइडर्स को भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किमी के भीतर एक मॉनिटरिंग जोन इंस्टॉल करना होगा, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बेहतर हो सके।
Starlink में हो सकती है देरी
जहां Jio और Airtel जैसी कंपनियां पहले से ही मौजूदा नियमों के तहत काम कर रही हैं, वहीं Starlink अभी तक पुराने गाइडलाइन का भी पालन नहीं कर पाई है। अब इन नए 30 सुरक्षा नियमों के चलते Starlink की भारत में शुरुआत और भी देरी से हो सकती है।


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