Starlink की भारत में एंट्री करीब, लेकिन अभी भी लेना होगा 4 से 5 अप्रूवल, जानिए क्या है पूरी कहानी
भारत में एलन मस्क के स्वामित्व वाली सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसकी शुरुआत से पहले कुछ जरूरी कदम अभी बाकी हैं। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक इंटरव्यू में बताया कि कंपनी ने जून में यूनिफाइड लाइसेंस (UL) हासिल किया और जुलाई में इन-स्पेस ऑथराइजेशन भी मिल गया है।

सेवाएं शुरू करने से पहले जरूरी प्रक्रियाएं
सिंधिया के अनुसार, स्टारलिंक को सेवाएं शुरू करने से पहले चार से पांच अहम मंज़िलें पार करनी होंगी। इनमें SATCOM गेटवे के लिए मंजूरी लेना, पॉइंट ऑफ प्रेज़ेंस तय करना, स्पेक्ट्रम हासिल करना और नेटवर्किंग उपकरणों के लिए लाइसेंस लेना शामिल है। सिंधिया ने स्पष्ट किया कि जैसे ही कंपनी ये प्रक्रियाएं पूरी करेगी, वह भारत में अपनी इंटरनेट सेवाएं शुरू कर सकेगी।
सिंधिया ने SATCOM (सैटेलाइट कम्युनिकेशन) को भारत के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह 'आज की तकनीक' है, कल की नहीं। उन्होंने दोहराया कि भारत ने 4G में जहां दुनिया का अनुसरण किया, वहीं 5G में दुनिया के साथ कदम मिलाया और अब 6G में नेतृत्व करने का लक्ष्य है।
सरकार का एडवांस कनेक्टिविटी पर जोर
सरकार की एडवांस कनेक्टिविटी पहल के तहत अब तक तीन कंपनियों जियो, वनवेब और अब स्टारलिंक को SATCOM लाइसेंस जारी किए गए हैं । सिंधिया ने कहा कि मेरा उद्देश्य है कि ग्राहकों को हर उपलब्ध तकनीक का लाभ मिले और एक प्रतिस्पर्धी माहौल बना रहे। मैं चाहता हूं कि वे जल्द से जल्द सेवाएं शुरू करें, लेकिन अब निर्णय और गति उनके हाथ में है।
टेलीकॉम फ्रॉड के खिलाफ कड़ा एक्शन
इंटरव्यू के दौरान मंत्री ने यह भी बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) देश में टेलीकॉम से जुड़े धोखाधड़ी मामलों पर सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। संचार साथी पोर्टल के जरिए अब तक 1.36 करोड़ मोबाइल कनेक्शन, जो फर्जी या अत्यधिक सिम रजिस्ट्रेशन के माध्यम से लिए गए थे, बंद कर दिए गए हैं।
इसके अलावा, 1.75 करोड़ कनेक्शन, जो असली मालिक के नाम पर पंजीकृत नहीं थे, को भी ब्लॉक किया गया है। पोर्टल की मदद से करीब 5 लाख चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उन्हें उनके मालिकों को वापस किया गया।
AI और नए ऐप की मदद
सिंधिया ने बताया कि मंत्रालय अब AI-आधारित टूल्स का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी करने वाले कनेक्शनों को ट्रैक और डिस्कनेक्ट कर रहा है। हाल ही में लॉन्च किए गए अस्त्र ऐप ने अब तक 82 लाख नंबरों की पहचान कर उन्हें बंद किया है, जो अवैध गतिविधियों में शामिल थे।
भविष्य की तस्वीर
स्टारलिंक की एंट्री से भारत के ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा पहुंचने की उम्मीद है। सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक से उन क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी संभव होगी, जहां ऑप्टिकल फाइबर बिछाना मुश्किल या महंगा है।
सरकार की नीतियां और प्रतिस्पर्धी माहौल यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि भारत में डिजिटल पहुंच तेजी से बढ़े और 5G व 6G जैसी उन्नत तकनीकें आम लोगों तक पहुंचे। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि स्टारलिंक कितनी जल्दी अपनी बाकी प्रक्रियाएं पूरी कर भारत में सेवाएं शुरू करता है।


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