टेलीकॉम इंडस्ट्री को महामारी के दौर में मैनपावर स्किल्स पर ध्यान देना चाहिए
विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य सेवा कर्मी जिस तरह से दिन-रात अथक परिश्रम कर रहे हैं, ठीक उसी तरह से टेलीकॉम इंडस्ट्री भी अर्थव्यवस्था को सहज बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसकी मदद से लोग दूर होते हुए भी आपस में जुड़े हुए हैं।
दूरसंचार कंपनियों और उनके बुनियादी ढांचे के साझेदारों ने पिछले 15 महीनों में 69,448 नए मोबाइल टॉवर लगाए हैं। कोरोनवायरस महामारी के मद्देनजर दूरसंचार कंपनियों ने नेटवर्क के क्षेत्र में 9,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे पता चलता है कि संचार सेवाओं के इस्तेमाल में कई गुना वृद्धि हुई है।

हाल के कुछ हफ्तों में मोबाइल इंटरनेट की खपत भी 50 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गई है, जिससे कनेक्टिविटी का महत्व कई गुना बढ़ गया है। टेलीकॉम भी एक ऐसा सेक्टर है, जो 5 जी, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लनिर्ंग जैसी नई तकनीकों और एप्लिकेशन के साथ तेजी से बदल रहा है। नतीजतन, टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के कौशल को भी अपग्रेड करना जरूरी हो जाता है।
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नोकिया इंडिया में मार्केटिंग और कॉर्पोरेट मामलों के प्रमुख अमित मारवाह ने रविवार को अपने एक बयान में कहा, 5जी सेवा के शुरू होने और अगली पीढ़ी के तकनीकियों के सामने आने से आने वाले समय में यह किसी चुनौती से कम नहीं है कि इससे संबंधित सक्षम और कुशल मैनपावर को सामने लाया जाए। जैसा कि टेलीकॉम इंडस्ट्री द्वारा भी अपने बुनियादी ढांचे में परिवर्तन लाया जा रहा है, भविष्य की तकनीकियों से सामंजस्य बिठाने के लिए तैयारी चल रही। ऐसे वक्त में हमें सही कौशल विकसित करने की दिशा में निवेश करने की आवश्यकता है। इंडस्ट्री इस बात को समझ पा रही है और इस दिशा में इसका काम करना जारी है।
भारत की जीडीपी में दूरसंचार उद्योग का योगदान 6.5 प्रतिशत है और इस उद्योग ने लगभग चालीस लाख लोगों को रोजगार दिलाया है। भारत में लगभग एक अरब लोग मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं और उनमें से लगभग आधे लोग सक्रिय रूप से मोबाइल इंटरनेट का उपयोग करते हैं।


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