e-Passport: भारत ही नहीं, इन 7 देशों के पास पहले से ही है ई-पासपोर्ट की सुविधा
e-Passport: कुछ समय पहले ही भारत सरकार ने चिप आधारित ई-पासपोर्ट की शुरुआत की है। ऐसा करने से भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो उसे माडर्न सुरक्षित सिक्योर और टेक्नोलॉजिकली एडवांस से उन्नत बनाता है। मई 2025 से देश के 13 शहरों में इस सेवा की शुरुआत हुई है। इसका उद्देश्य न केवल ट्रैवलिंग को ज्यादा सुरक्षित बनाना है, बल्कि बॉर्डर सिक्योरिटी को मजबूत करना और पहचान धोखाधड़ी (Identity Fraud) को रोकना भी है।
इस कदम के साथ भारत अब उन देशों की कतार में आ गया है, जो पहले से ही इस तकनीक को अपनाकर इसका फायदा उठा रहे हैं। आइए जानते हैं उन 7 देशों के बारे में जिन्होंने ई-पासपोर्ट को पहले ही लागू कर दिया है।

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
अमेरिका ने 2007 में ई-पासपोर्ट को शुरू किया था। सभी अमेरिकी पासपोर्ट में RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) चिप होती है, जिसमें डिजिटल फोटो और फिंगरप्रिंट जैसे बायोमेट्रिक डेटा स्टोर किया जाता है। ये पासपोर्ट ऑटोमेटेड ई-गेट्स के माध्यम से तेजी से चेक-इन की सुविधा देते हैं, जिससे ट्रेवलिंग प्रोसेस ज्यादा आसान और सुरक्षित हो जाती है।
कनाडा
इस लिस्ट में अगला नाम कनाडा का है, जिसने 2013 में ई-पासपोर्ट को लागू किया था। इसमें भी इलेक्ट्रॉनिक चिप होती है जो पासपोर्ट यूजर की पर्सनल और बायोमेट्रिक जानकारी सिक्योर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह पासपोर्ट डिजिटल सिग्नेचर जैसे उन्नत सिक्योरिटी फीचर्स के साथ आता है, जिससे डेटा में किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोका जा सकता है।
मेक्सिको
मेक्सिको ने हाल के साल यानी 2021 में ई-पासपोर्ट को लागू किया। देश में इस सुविधा को शुरू करने का उद्देश्य ट्रेवलिंग डॉक्यूमेंट को ज्यादा सिक्योर बनाने और इंटरनेशनल जर्नी को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करना है। बता दें कि यह पासपोर्ट ICAO (इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन) स्टैंडर्ड के आधार पर काम करता है और बायोमेट्रिक स्कैनिंग के साथ आता है।
ब्राजील
साल 2010 में ब्राजील ने ई-पासपोर्ट की शुरुआत की थी। इसमें चिप लगी होती है जो पासपोर्ट धारक की फेस इमेज और फिंगरप्रिंट से जुड़ी जानकारी स्टोर करती है। ब्राजील ने भी इंटरनेशनल ट्रैवलिंग को आसान और सिक्योर बनाने के लिए ये सुविधा लेकर आया है। इससे आईडी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज और अधिक सुरक्षित होती है। साथ ही, यह पासपोर्ट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप काम करता है।
फ्रांस
फ्रांस ने 2006 में बायोमेट्रिक ई-पासपोर्ट जारी करना शुरू किया। इन पासपोर्ट में चिप होती है, जो यूजर की चेहरे की बायोमेट्रिक जानकारी और कुछ मामलों में फिंगरप्रिंट भी सिक्योर करती है। फ्रांस का यह कदम यूरोपीय यूनियन के सिक्योर जर्नी के लिए डॉक्यूमेंट को सलामत रखने की दिशा में एक जरूरी पहल माना गया।
इटली
फ्रांस के साथ ही इटली ने भी 2006 में ई-पासपोर्ट लागू किया। इसमें फेस और फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक डेटा वाली चिप होती है। इटली ने इसे अपने बॉर्डर कंट्रोल सिस्टम के साथ जोड़ा है, जिससे यात्रियों की चेकिंग प्रोसेस तेज और आसान हुई है। बता दें कि यह पासपोर्ट EU और ICAO के सभी नियमों का पालन करता है।
जापान
जापान एक टेक्नोलॉजी फ्रेंडली से उन्नत देश है। ऐसे में यह देश इसमें कैसे पीछे रह सकता है। जापान ने 2006 में ई-पासपोर्ट को अपनाया। इन पासपोर्ट में बायोमेट्रिक जानकारी होती है और यह विश्वभर में ऑटोमेटेड पासपोर्ट चेक सिस्टम्स के साथ कंपेटिबल है। इससे जापानी नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा सरल और तेज हो गई है।
भारत ने क्यों उठाया ये कदम?
जैसा कि हम जानते हैं कि अब भारत भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। भारत का यह कदम न केवल यात्रा को अधिक आधुनिक और डिजिटल बनाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पासपोर्ट को ज्यादा सिक्योर भी बनाएगा।
ई-पासपोर्ट में लगी चिप में यात्री की बायोमेट्रिक जानकारी सुरक्षित रूप से दर्ज होगी, जिससे फर्जीवाड़ा रोकने में मदद मिलेगी।
इससे कोई भी अनचाहा व्यक्ति या अपराधी आसानी से देश में एंट्री नहीं कर सकेगा। इससे न केवल विदेशी यात्राएं अधिक सुरक्षित होंगी, बल्कि हवाई अड्डों पर चेकिंग प्रोसेस भी तेज हो जाएगी।


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