टॉप 10: हिला कर रख देंगे गूगल के बारे में 10 फैक्ट्स
दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी गूगल के बारे में कई ऐसे छुपे हुए राज हैं जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं।
गूगल! आज के समय में शायद ही कोई हो जो गूगल के नाम से अनजान हो। दुनिया के सबसे बड़े इस सर्च इंजन पर आपके लगभग हर सवाल का जवाब है। या यूं कहें कि हर समस्या का समाधान है।
गूगल के होम पेज को गौर से देखें तो यह बेहद खाली सा लगता है, लेकिन बता दें कि ऐसा इसलिए है क्योंकि गूगल को बनाते हुए को-फाउंडर लैरी और ब्रिन को html की अधिक जानकारी नहीं थी।
है न मजेदार बात! गूगल से जुड़ी ऐसी ही कुछ मजेदार और हैरान कर देने वाली बातें आज हम आपको बताने जा रहे हैं। तो चलिए, जिस गूगल के पास हर बात की जानकारी आज थोड़ी जानकारी उसके बारे में भी हो जाए।
गूगल का नाम
गूगल का नाम मथेमेटिकल टर्म Googol से पड़ा है। इस पर 1 के बाद 100 ज़ीरो लगते हैं। कहते हैं कि डोमेन रजिस्टर करते हुए Googolकी गलत स्पेलिंग (Google) लिख दी गई थी।
बैकरब
गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज और सर्गी ब्रिन ने गूगल का नाम सबसे पहले बैकरब रखा था।
कमाई
आपका चाहिता गूगल जानते हैं कितनी कमाई करता है? ये सुनकर तो आप जरुर दांतों तले ऊँगली चबा लेंगे। गूगल एक सेकंड में लगभग 1,30,900 रुपए कमाता है।
कई कंपनियां खरीद चुका है गूगल
आंकड़ों की मानें तो गूगल ने साल 2014 के बाद से हर सप्ताह औसतन कम से कम एक कंपनी को खरीदा है।
जॉब एप्लीकेशन
दुनिया के सबसे बड़े इस सर्च इंजन में कौन काम नहीं करना चाहता है। हर हफ्ते गूगल में 20,000 से भी अधिक लोग जॉब के लिए अप्लाई करते हैं।
23 मार्कउप एरर
आज के समय की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण वेबसाइट गूगल के कोड में 23 मार्कउप एरर हैं।
गूगल के ऑफिस में आती हैं बकरियां
गूगल के हेड ऑफिस में करीब 200 बकरियों को घास की कटाई के लिए रखा गया है। यह बकरियां लॉन के घास को खाती हैं। गूगल मशीन का इस्तेमाल घास काटने के लिए नहीं करता है, क्योंकि मशीन से निकलने वाले धुंए और आवाज से ऑफिस में काम कर रहे लोगों को परेशानी होती है।
सबसे पहले डूडल
गूगल पर सबसे पहला डूडल 30 अगस्त 1998 में दिया गया था। जब लैरी और सर्गी नेवादा में बर्निंग मैन फेस्टिवल में शामिल होने गए थे। इस डूडल से वो जानकारी देना चाहते थे कि वह ऑफिस से बाहर हैं और सर्वर क्रेश जैसे टेक्निकल इशू को फिक्स नहीं कर सकते हैं।
गूगल का नासा में अपना रनवे है
लैरी और ब्रिन के प्राइवेट प्लेन के लिए नासा में अपना रनवे है, जहाँ कोई और प्लेन को आने की अनुमति नहीं है।
खुद को बेचना चाहता था गूगल
साल 1999 में गूगल खुद को बेचना चाहता था। गूगल यह सौदा एक्साइट ऑनलाइन कंपनी के साथ करने जा रहा था, जिसमें वह $1 मिलियन में खुद को बेच रहा था, लेकिन एक्साइट के सीईओ ने यह ऑफर ठुकरा दिया।


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