TRAI का बड़ा फैसला: अब ₹100 से कम में मिलेगी कॉलिंग, महंगे डेटा पैक से मिलेगी आजादी!
टेलीकॉम रेगुलेटर (TRAI) ने फीडबैक देने की समय सीमा को 5 मई, 2026 तक बढ़ा दिया है। इस पूरी चर्चा का मुख्य केंद्र भारतीय नागरिकों के लिए सस्ते वॉयस और SMS प्लान को अनिवार्य बनाना है। फिलहाल, कई यूजर्स को महसूस होता है कि उन्हें सिर्फ बेसिक कॉलिंग के लिए भी मजबूरी में महंगे डेटा पैक खरीदने पड़ रहे हैं। इस कदम के बाद जल्द ही देशभर में बिना डेटा वाले किफायती रिचार्ज की वापसी हो सकती है।
जियो और एयरटेल जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां अभी लगभग हर प्लान के साथ मोबाइल डेटा बंडल करके देती हैं। इस ट्रेंड की वजह से आम लोगों के लिए मोबाइल कनेक्शन एक्टिव रखना काफी महंगा हो गया है। खासकर सेकेंडरी सिम इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को ये अनिवार्य डेटा पैक पैसों की बर्बादी लगते हैं। TRAI की कोशिश है कि बिना किसी फालतू खर्च के बेसिक कम्युनिकेशन की सुविधा हर किसी की पहुंच में रहे।

TRAI के वॉयस-ओनली मोबाइल पैक और सस्ते नो-डेटा रिचार्ज पर फोकस
टेलीकॉम कंपनियां इस बदलाव को लेकर थोड़ी हिचकिचा रही हैं, क्योंकि सस्ते प्लान आने से उनकी प्रति यूजर औसत कमाई (ARPU) घट सकती है। हालांकि, रेगुलेटर मुनाफे के बजाय ग्राहकों की पसंद और किफायती दरों को प्राथमिकता दे रहा है। डेडलाइन बढ़ने से अब इस बात का गहराई से अध्ययन किया जा सकेगा कि इन बदलावों का इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा। इसी फैसले से तय होगा कि आपका अगला रिचार्ज आज के मुकाबले सस्ता होगा या नहीं।
| प्लान की कैटेगरी | मौजूदा बंडल पैक | प्रस्तावित वॉयस-ओनली पैक |
|---|---|---|
| अनुमानित मासिक खर्च | ₹155 से ₹239 | ₹100 से कम (अनुमानित) |
| डेटा की सुविधा | औसतन 1.5GB रोजाना | इंटरनेट डेटा नहीं |
| मुख्य उपयोग | स्मार्टफोन ब्राउजिंग | सिर्फ कॉलिंग और वैलिडिटी |
रिटेल ऐप्स के रुझान बताते हैं कि बड़ी संख्या में यूजर्स 200 रुपये से कम वाले सिंपल पैक की तलाश में रहते हैं। अभी ज्यादातर विकल्पों में हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए पैसे चुकाने पड़ते हैं, जिसकी जरूरत बहुत कम लोगों को होती है। एक डेडिकेटेड वॉयस-ओनली वाउचर से ग्रामीण भारत के करोड़ों फीचर फोन यूजर्स को सीधा फायदा होगा। इस पॉलिसी का मकसद लोगों को ज्यादा विकल्प देकर डिजिटल अंतर को कम करना है।
5 मई की समय सीमा खत्म होने के बाद आने वाला अंतिम फैसला मोबाइल मार्केट की तस्वीर बदल सकता है। रेगुलेटर का मानना है कि किफायती कनेक्टिविटी एक अधिकार है, जिसे वह नए नियमों के जरिए सुरक्षित करना चाहता है। ग्राहकों को इन सस्ते रिचार्ज विकल्पों पर जल्द ही आधिकारिक अपडेट मिलने की उम्मीद है। करोड़ों भारतीय मोबाइल यूजर्स के लिए अब कम खर्च में बात करना जल्द ही हकीकत बन सकता है।


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