Trump ट्रैरिफ का दिखा असर; चीन से टेंशन के बाद भारत में बनेंगे लगभग 8 करोड़ iPhone
Apple iPhone Production Increase in India: Trump ट्रैरिफ का असर चीन और यूएस के रिश्ते पर देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ चीन तेजी से यूएस के टॉप ब्रांड्स की एक्सपोज करने में लगा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ Apple अब तेजी से भारत में iPhone प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना बना रहा है। इसका मुख्य कारण चीन पर मैन्युफैक्चरिंग की निर्भरता को कम करना और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान हो रही समस्याओं से खुद का बचाव करना है।
आपको बता दें कि Apple भारत में हर साल लगभग 40 से 43 मिलियन (लगभग 4 करोड़) iPhone का मैन्युफैक्चर कर रहा है, जिनमें से करीब 80% फोनों को एक्सपोर्ट किया जाता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो कंपनी का लक्ष्य 2026 के अंत तक आईफोन प्रोडक्शन बढ़ाकर 70 से 80 मिलियन यूनिट्स तक पहुंचाना है। इससे भारत अमेरिका के लिए सबसे बड़ा iPhone सप्लायर बन सकता है।

प्रोडक्शन का नया सेंटर होगा भारत
Apple भारत में Foxconn और Tata Electronics के जरिए अपने प्रोडक्शन का विस्तार कर रहा है। गौरतलब है कि Tata Electronics ने हाल ही में Wistron और Pegatron की भारतीय यूनिट को ओवरटेक कर लिया है।
एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले 18 महीनों में भारत से होने वाली वैश्विक iPhone सेल का हिस्सा मौजूदा 18-20% से बढ़कर 40% तक पहुंच सकता है।
IDC इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट नवकेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में भारत से होने वाला iPhone प्रोडक्शन ग्लोबल शिपमेंट का लगभग 17-20% है।
अगर इसे दोगुना करना है तो सालाना 70-80 मिलियन (8 करोड़) यूनिट्स का निर्माण करना होगा। इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
सरकार की मदद की होगी जरूरत
भारत सरकार भी इस बदलाव को समर्थन देने के लिए Apple और उसके सप्लायर्स के साथ मिलकर काम करेगी। अधिकारियों ने बताया कि इससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि भारत को इस अवसर का पूरी तरह से फायदा उठाना चाहिए। ऐसे में उन्हें भी कुछ प्रमुख सुधार करने होंगे।
भारत को वियतनाम और चीन के मुकाबले 7-7.5% अधिक लागत का नुकसान उठाना पड़ता है। यदि भारत को GVCs में सबसे ऊंचा स्थान पाना है, तो उसे लागत में कमी लानी होगी और टैक्स व टैरिफ से जुड़ी नीतिगत अनिश्चितताओं को दूर करना होगा।
नीति आयोग द्वारा की गई एक स्टडी के मुताबिक, भारत को इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स पर लगने वाले शुल्क को चीन और वियतनाम के स्तर तक कम करना चाहिए ताकि निर्यात प्रतिस्पर्धी बन सके।
अगर भारत सही कदम उठाता है तो न केवल iPhone प्रोडक्शन का केंद्र बनेगा, बल्कि ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी उभर सकता है।


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