Google के AI Search पर यूके सरकार की सख्ती! News Publishers के हक में बड़ा कदम, भारत के लिए भी संकेत
यूके में Competition and Markets Authority (CMA) ने Google के AI-पावर्ड सर्च फीचर्स पर सख़्त रुख अपनाया है। रेगुलेटर का कहना है कि Google के AI Overviews और AI Mode जैसे टूल्स यूज़र्स और पब्लिशर्स, दोनों के लिए पारदर्शिता और कंट्रोल की कमी पैदा कर रहे हैं।
CMA चाहती है कि यूज़र्स को साफ़ विकल्प मिलें और कंटेंट क्रिएटर्स को यह तय करने का अधिकार हो कि उनका कंटेंट AI समरी या AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल हो या नहीं।

AI Overviews और AI Mode पर आपत्ति क्यों?
CMA की चिंता का केंद्र यह है कि AI-जनरेटेड समरी सर्च रिज़ल्ट्स के टॉप पर दिखती हैं। इससे यूज़र सीधे मूल खबर या वेबसाइट पर जाने के बजाय सारांश पर ही निर्भर हो जाते हैं। नतीजा, न्यूज पब्लिशर्स की ट्रैफिक और रेवेन्यू पर असर पड़ता है। रेगुलेटर के मुताबिक, यह ट्रेंड डिजिटल जर्नलिज़्म की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।
पब्लिशर्स के लिए "ऑप्ट-आउट" की मांग
CMA ने प्रस्ताव रखा है कि Google पब्लिशर्स को ऑप्ट-आउट का विकल्प दे-ताकि वे चाहें तो अपने आर्टिकल्स को AI Overviews में दिखने या AI मॉडल ट्रेनिंग से रोक सकें।
साथ ही, यह भी साफ़ किया जाए कि AI-जनरेटेड रिज़ल्ट्स में न्यूज़ और वेबसाइट कंटेंट कैसे इस्तेमाल हो रहा है। रेगुलेटर का कहना है कि इससे पब्लिशर्स को "फेयर डील" मिलेगी और यूज़र्स को भरोसेमंद सर्च अनुभव।
Google से बातचीत शुरू
CMA ने आधिकारिक बयान में बताया कि उसने Google के साथ इन बदलावों पर बातचीत शुरू कर दी है। मकसद इनोवेशन को रोकना नहीं, बल्कि ऐसा फ्रेमवर्क बनाना है जिसमें गुणवत्ता, पारदर्शिता और विकल्प-तीनों सुनिश्चित हों।
CMA के सीईओ Sarah Cardell के मुताबिक, लक्षित और संतुलित कदम यूके के बिज़नेस और कंज़्यूमर्स को ज़्यादा नियंत्रण देंगे और टेक इकोसिस्टम में प्रतिस्पर्धा बढ़ाएंगे।
यूके में Google की पकड़ और विज्ञापन खर्च
यूके में 90% से ज़्यादा ऑनलाइन सर्च Google पर होते हैं। पिछले साल ही 2 लाख से अधिक यूके बिज़नेस ने Google Search विज्ञापनों पर करीब £10 बिलियन (लगभग ₹1.25 लाख करोड़) खर्च किए।
इतनी बड़ी निर्भरता को देखते हुए CMA मानती है कि सख़्त नियम ज़रूरी हैं, ताकि सर्च मार्केट में निष्पक्षता बनी रहे।
भारत के लिए संकेत?
यूके की यह पहल भारत के लिए भी अहम संकेत देती है। भारतीय न्यूज़ पब्लिशर्स और डिजिटल मीडिया हाउसेज़ भी ट्रैफिक के लिए Google पर काफी निर्भर हैं।
जैसे-जैसे AI Overviews बढ़ रहे हैं, बिना क्लिक के खबर पढ़ने का चलन यहां भी बढ़ सकता है। अगर भारत में इसी तरह की चर्चा शुरू होती है, तो इससे पब्लिशर रेवेन्यू की सुरक्षा, ओरिजिनल जर्नलिज्म को क्रेडिट और AI इस्तेमाल में पारदर्शिता को बल मिल सकता है।
आगे क्या?
अभी यह प्रक्रिया शुरुआती दौर में है। CMA और Google के बीच बातचीत से तय होगा कि AI-पावर्ड सर्च का भविष्य कैसा होगा, जहां इनोवेशन भी रहे और कंटेंट क्रिएटर्स के अधिकार भी सुरक्षित रहें। यूज़र्स के लिए भी यह अहम है, क्योंकि साफ़ विकल्प और डेटा कंट्रोल बेहतर डिजिटल अनुभव की कुंजी हैं।
निष्कर्ष: AI सर्च उपयोगी है, लेकिन जब उसका असर पूरे न्यूज़ इकोसिस्टम पर पड़े, तो संतुलन ज़रूरी है। यूके का कदम इस बहस को नई दिशा देता है और भारत समेत बाकी देशों के लिए भी सोचने का मौका होगा।


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