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US-China Tariff War: क्या बढ़ जाएंगे Smartphone और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम; सप्लाई चेन पर क्या होगा असर

US-China Tariff War:अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनावों ने ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को गंभीर चिंता में डाल दिया है। जैसा कि हम जानते हैं, अमेरिका ने चीन से इम्पोर्ट होने वाले प्रोडक्ट पर 245% तक के टैरिफ लगाने का फैसला किया है।

ऐसे में इसका असर कंज्यूमर्स और मैन्युफैक्चरर दोनों को देखने को मिल सकता है। इसके कारण उन्हें कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

Smartphone और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमत पर US-China Tariff का असर

कंज्यूमर पर बढ़ता बोझ

245% तक के टैरिफ के कारण स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

ऐसे में कंपनियों को या तो इन एक्स्ट्रा एक्सपेंस को खुद वहन करना होगा या वे अपने कंज्यूमर्स को इसे ट्रांसफर करेंगे। ऐसे में पूरी संभावना है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

इतना ही नहीं, इसका सबसे ज्यादा असर बजट और मिड-रेंज सेगमेंट के डिवाइस पर दिखाई देगा। इनकी कीमतों में 10-15% तक की वृद्धि देखी जा सकती है।

प्रोडक्शन की लोकेशन होगी चेंज

ऐसा हो सकता है कि टैरिफ से बचने के लिए कई तकनीकी कंपनियां अपने प्रोडक्ट सेंटर को चीन से बाहर ट्रांसफर कर दें।

जैसा कि हम जानते हैं, Apple ने भारत में iPhones का प्रोडक्शन बढ़ाया है, जबकि Dell और HP जैसे ब्रांड वियतनाम और मैक्सिको में अपने सेंटर इंस्टॉल कर रहे हैं।

हालांकि इसमें काफी समय लग सकता है, क्योंकि फैक्ट्रियों का निर्माण, कर्मचारियों का ट्रेनिंग और सप्लाई चेन को फिर से तैयार करना आसान काम नहीं होगा।

कच्चे माल की कमी

यूएस के इस कदम के बाद चीन ने प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका पर गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमनी जैसे जरूरी कॉम्पोनेंट के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। ये एलिमेंट सेमीकंडक्टर्स, डिस्प्ले और बैटरियां बनाने में इस्तेमाल होते हैं।
ऐसे में इस प्रतिबंध के कारण, अमेरिकी और ग्लोबल कंपनियां ऑप्शनल सप्लायर की तलाश में हैं, लेकिन नए सप्लाई चेन को इंस्टॉल करने में समय लगेगा, जिससे प्रोडक्शन में देरी और लागत में वृद्धि हो सकती है।

कंज्यूमर्स को होगा ये नुकसान

उच्च कीमतें: टैरिफ के कारण इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

उपलब्धता में कमी: प्रोडक्शन और सप्लाई में देरी के कारण, कुछ प्रोडक्ट की उपलब्धता में भी कमी आ सकती है।

ऑप्शन में कमी: कुछ चीनी ब्रांड अमेरिकी बाजार से पीछे हट सकते हैं, जिससे कंज्यूमर्स के पास कम ऑप्शन होंगे।

क्वॉलिटी में कमी: लागत को कम करने के लिए कुछ कंपनियां प्रोडक्ट की क्वालिटी में कमी कर सकती हैं।

क्या करें कंज्यूमर्स?

जब तक अमेरिका और चीन के बीच व्यापार संबंधों में सुधार नहीं होता, तब तक कंज्यूमर्स को उच्च कीमतों और सीमित विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति में जरूरी है कि वे अपने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की देखभाल करें, मरम्मत और रीयूज के बारे में विचार करें।

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