'सेरेस' नाम के ग्रह पर मिले पानी के सबूत
हर्शेल अंतरिक्ष वेधशाला के वैज्ञानिकों ने उम्मीद के विपरीत एक विशाल क्षुद्र ग्रह पर पानी खोज निकाला। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में पाए जाने वाले क्षुद्र ग्रहों में सबसे विशाल एवं वृत्ताकार सेरेस नामक एक ऐसे खगोलीय पिंड को ढूंढ निकाला जिसकी सतह पर जलवाष्प पाई गई है।
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सेरेस नामक इस खगोलीय पिंड को वैज्ञानिक बौना ग्रह की श्रेणी में रखते हैं। बौना ग्रह ऐसे खगोलीय पिंड को कहते हैं जो क्षुद्र ग्रह से बड़े होते हैं, तथा ग्रह से छोटे। वैज्ञानिकों का मानना है कि सेरेस के सतह की बर्फ गर्म होने के कारण यहां नियमित तौर पर वाष्प दिखाई दी।
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स्पेन में स्थित यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के माइकल कूपर्स ने शोध पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित अपने रिसर्च पेपर में कहा है, सेरेस या अंतरिक्ष में विद्यमान क्षुद्र ग्रहों में से किसी भी खगोलीय पिंड पर पहली बार जल वाष्प देखा गया। इससे प्रमाणित होता है कि सेरेस की सतह पर बर्फ है तथा उसका अपना वातावरण भी है।
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Photo source- abcnews.go.com
पिछली शताब्दी में सेरेस को हमारे सौर मंडल के सबसे बड़ा क्षुद्र ग्रह के रूप में जाना जाता था। लेकिन 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने सेरेस को उसके विशाल आकार के कारण बौने ग्रह का दर्जा दिया। इसका व्यास लगभग 950 किलोमीटर है।
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वैज्ञानिकों का मानना है कि सेरेस की भीतरी सतह पर पर्वत हैं, जिसमें एक मोटी परत बर्फ की है, जो यदि पिघला तो पृथ्वी पर मौजूद पानी से भी अधिक ताजे पानी वाला खगोलीय पिंड बन जाएगा। नासा ने सेरेस के लिए एक विशेष अभियान 'डान' पहले से ही चला रखा है। डान के वर्ष 2015 की शुरुआत तक सेरेस पर पहुंचने की उम्मीद है।


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