ई-पेपर डिस्प्ले क्या है, ये कैसे काम करता है?
आजकल हर कोई मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और कंप्यूटर की डिजिटल स्क्रीन पर दिन रात अपना चहरा टिका कर रखता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन स्क्रीन के अलावा एक और बहुत ही अनोखी तकनीक मौजूद है जिसे ई-पेपर डिस्प्ले कहा जाता है? ये ऐसा डिस्प्ले है जो सचमुच एक पेपर की तरह दिखता है।
अगर आपने कभी अमेज़न के किंडल या कुछ दूसरे ई-बुक रीडर का इस्तेमाल किया है, तो इन सभी डिवाइस में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें जैसे ही आप किसी पेज को खोलते हैं, तो वो एकदम असली पेपर सी लगती है।

ई-पेपर डिस्प्ले काम कैसे करता है?
दरअसल, ई-पेपर डिस्प्ले में एक खास तरह का तरल पदार्थ शामिल होता है जिसमें काले और सफेद रंग के अरबों छोटे-छोटे कण होते हैं। जब इस पदार्थ पर बिजली का एक छोटा सा झटका दिया जाता है, तो ये सारे कण अलग-अलग हो जाते हैं और काले व सफेद रंग का अलग-अलग एरिया बना लेते हैं। इन्हीं एरिया में स्क्रीन पर अक्षर और तस्वीर उभरती हैं।
अब जो सबसे खास बात है, वो ये कि इस तकनीक में लगातार बिजली की जरूरत नहीं पड़ती। एक बार अक्षर या तस्वीर स्क्रीन पर आ गई उसके बाद इसमें बिजली नहीं चाहिए। स्क्रीन वैसे ही बनी रहेगी जब तक कि आप उसे बदलेंगे नहीं, सिर्फ पेज बदलने या नए अक्षर लाने पर ही थोड़ी बिजली खर्च होगी।
इस वजह से इसमें काफी बैटरी की बचत होती है। यही वजह है कि आज ई-बुक रीडर और कुछ स्मार्टवॉच में ये टेक्नोलॉजी काफी पॉपुलर हो रही है। एक प्रिंटेड पेज की तरह ही, ई-पेपर डिस्प्ले पढ़ने में भी काफी आरामदायक होती है। इसमें आंखों को अधिक तकलीफ नहीं होती है साथ ही, यहां अक्षर बहुत साफ दिखाई देते हैं, भले ही धूप हो या अंधेरा।
कुछ टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट तो यहां तक कहते हैं कि भविष्य में शायद हमारी सभी स्क्रीन और मोबाइल डिस्प्ले भी ई-पेपर जैसी ही होंगी। उनमें रंग भी आएगा और वे पिक्सेलेटेड भी होंगी। लेकिन बैटरी सेविंग और पढ़ने के नजरिए से वे आज की स्क्रीन से कहीं बेहतर होंगी।
तो अगली बार जब आप किसी ई-बुक को पढ़ें, तो उस खास स्क्रीन का मज़ा लेना ना भूलें। जो पढ़ने का एक्सपीरियंस असली पेपर की तरह देती है।


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