कहीं मुसीबत में न डाल दे स्मार्टफोन का फेस अनलॉक फीचर
स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसी को देखते हुए मार्केट में मौजूद कंपनियां यूनिक फीचर्स स्मार्टफोन लॉन्च कर रही हैं। इस समय स्मार्टफोन में फेस रिकॉग्नाइजेशन फीचर काफी पॉपुलर है। इस फीचर की पॉपुलरिटी को देखते हुए लगभग सभी कंपनियां एंट्री लेवल स्मार्टफोन से लेकर महंगे स्मार्टफोन में ये फीचर पेश कर रही हैं। हालांकि कुछ रिपोर्ट में स्मार्टफोन के फेस अनलॉक फीचर पर सवाल उठाए गए हैं और फोन की सुरक्षा के लिए इस फीचर को ऑथेंटिक नहीं माना गया है।

क्या है फेस अनलॉक फीचर
स्मार्टफोन में डेटा की सिक्योरिटी के लिए कई सारे लॉक ऑप्शन होते हैं, जैसे नंबर और पासवर्ड और पैटर्न लॉक। इसके अलावा नई तकनीक में स्मार्टफोन के लिए फिंगर प्रिंट सेंसर और फेस रिकॉग्नाइजेशन जैसे ऑप्शन दिए गए हैं। फिंगर प्रिंट सेंसर में फोन का मालिक ही अपने फिंगर प्रिंट के जरिए फोन अनलॉक कर सकता है, वहीं फेस रिकॉग्नाइजेशन फीचर में यूजर्स यूजर के चेहरे को पहचानकर फोन अनलॉक होता है। यूजर को सिर्फ फोन को अपने चेहरे के सामने लाना होता है और फोन अनलॉक हो जाता है। ये फीचर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक के साथ मिलकर काम करता है। हालांकि फेस अनलॉक फीचर की ऑथेंसिटी को लेकर अब सवाल खड़े हो चुके हैं।
कब आई थी फेस रिकॉग्नाइजेशन तकनीक
अगर आप सोचते हैं कि फेस अनलॉक फीचर के साथ आने वाला आईफोन X पहला स्मार्टफोन था, तो आप गलत हैं। ये तकनीक सबसे पहले साल 2011 में एंड्रॉयड 4.0 के लिए लॉन्च किया था। हालांकि उस समय से तकनीक इतनी विकसित नहीं हो सकी थी। चेहरे के जरिए अनलॉक करने में ज्यादा समय लगता था, इसीलिए ये फीचर ज्यादा पॉपुलर नहीं हुआ। इसके बाद मार्च 2017 में सैमसंग ने पहली बार Galaxy S8 और Galaxy S8+ स्मार्टफोन के साथ ये फीचर पेश किया। फेस अनलॉक फीचर को पिछले साल ऐपल के फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone X के साथ में पेश किया गया ये सिक्योरिटी फीचर स्मार्टफोन यूजर्स के बीच काफी पॉपुलर हो गया।
कैसे काम करता है फेस अनलॉक फीचर
महंगे फ्लैगशिप स्मार्टफोन की बात करें, तो इनमें फेस रिकॉग्नाइजेशन तकनीक आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित होती है और ट्रू डेप्थ कैमरा सिस्टम के साथ चलती है। ये तकनीक यूजर्स के चेहरे को पहचानने के लिए 30000 इनविजिबल डॉट्स का यूनिक 3डी मॉडल बनाती है। फोन को अनलॉ करने के लिए जैसे ही फ्रंट कैमरा को ऑन किया जाता है, तो ये तकनीक उन डॉट्स और 3जी मॉडल को रीड करती है और मैच होने के बाद फोन अनलॉक हो जाता है। आईफोन X में फोन का कैमरा इंफ्रारेड (IR) कैमरे के जरिए, डॉट पैटर्न को पढ़कर इंफ्रारेड इमेजन को कैप्चर कर लेता है। इसके बाद इस इमेज को वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाता है और इसके बाद फोन अनलॉक हो जाता है। फोन अनलॉक होने में 1 से 2 सेकेंड का समय लगता है।
क्यों सुरक्षित नहीं है फेस रिकॉग्नाइजेशन फीचर
महंगे और फ्लैगशिप फोन में ये फीचर ऑथेंटिक होता है लेकिन बजट और एंट्री लेवल स्मार्टफोन में ये फीचर फ्रंट कैमरा और एलगोरिदम पर बेस्ड होता है। सस्ते स्मार्टफोन में फेस रिकॉग्नाइजेशन तकनीक IR सेंसर और डॉट प्रोजेक्टर से लैस रेग्यूलर 2डी कैमरा पर आधारित होती है, जिसे चकमा दिया जा सकता है। ऐसे में कई बार सिर्फ तस्वीर या मास्क के जरिए भी फोन अनलॉक हो जाता है। कई एंड्रॉइड स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने कहा है कि फेस अनलॉकिंग फीचर, फिंगरप्रिंट और पासवर्ड की तुलना में ज्यादा असुरक्षित है। इसी वजह से सैमसंग, वनप्लस और शाओमी जैसी कंपनियां इस फीचर के साथ में एक डिस्क्लेमर भी देती हैं।
कैसे करें बचाव
अगर आप स्मार्टफोन यूजर हैं और फेस अनलॉक फीचर का इस्तेमाल सिक्योरिटी फीचर के तौर पर करते हैं, तो इसे बदलकर पैटर्न या पासवर्ड सिक्योरिटी ऑप्शन का इस्तेमाल करें। सेंटर फॉर इंटरनेट सिक्योरिटी के एग्जेक्यूटिव डायरेक्ट सुनील अब्राहम के मुताबिक, फेस आईडी एक असुरक्षित फीचर है। इसके लिए कंपनियों को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि कंपनियां ने फेस आईडी के अलावा कई सिक्योर विकल्प पैटर्न और पासवर्ड दिए हैं।


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