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प्रोजेक्टर्स क्या होता है, इसके प्रकार और फायदों के बारे में जानिए

अगर आप सिनेमाघरों में फिल्म देखने के दीवाने हैं तो ये आर्टिकल ज़रुर पढ़ें। क्योंकि हम आपको बताएंगे कि आप कैसे घर में बैठकर ही सिनेमाघर में फिल्म देखने जैसा मज़ा ले सकते हैं।

प्रोजेक्टर्स क्या होता है, इसके प्रकार और फायदों के बारे में जानिए

इसके लिए आपको घर पर प्रोजेक्टर लगाने की ज़रुरत पड़ेगी। लेकिन प्रोजेक्टर लगाते वक्त आपको उसकी सही माउंटिंग, स्टेबिलिटी और सही प्लेसमेंट की जानकारी होनी चाहिए। यदि आप घर में होम प्रोजेक्टर लगाने वाले हैं, तो उसके मुताबिक आप एक निश्चित दूरी से मिलने वाली इमेज के साइज का आकलन कर सकते हैं। यहां दूरी से मतलब आपके प्रोजेक्टर और दीवार या स्क्रीन के बीच की दूरी से है। आप प्रोजेक्टर के थ्रो रेशियो में दूरी से भाग देकर इमेज साइज का पता लगा सकते हैं।

मान लीजिए, प्रोजेक्टर स्क्रीन से 10 फीट की दूरी पर है और इसका थ्रो रेश्यो 1.8 से 2.22 है, तो आपका इमेज साइज 54 से लेकर 66 इंच तक ही होगी। स्क्रीन की इमेज पिक्सलेट ना हो इसके लिए सुनिश्चित करना जरूरी है कि आपके और स्क्रीन के बीच की दूरी, इमेज की चौड़ाई से दोगुनी होनी चाहिए। चलिए अब जानते हैं प्रोजेक्टर के प्रकार!

प्रोजेक्टर के प्रकार

प्रोजेक्टर को तीन भागों में बांटा गया है जो कि उसके काम करने की तकनीक पर आधारित हैं। ये हैं- डीएलपी, एलसीडी और एलईडी प्रोजेक्टर। बता दें कि आजकल पॉकेट प्रोजेक्टर भी उपलब्ध हैं।

डीएलपी: डीएलपी (डिजिटल लाइट प्रोसेसिंग) में छोटी सी माइक्रोस्कोपिक मिरर की बनी चिप होती है। और इसमें एक स्पिनिंग कलर व्हील होता है। डीएलपी का रेस्पॉन्स टाइम बेहतर होने के साथ साथ इसमें इमेजेज भी शार्प मिलती है। साथ ही ये 3डी आउटपुट देने में भी कैपेबल है। यह एक्टिव और पैसिव, दोनों तरह के प्रोजेक्शन को सपोर्ट करता है।

एलसीडी प्रोजेक्टर: एलसीडी प्रोजेक्टर्स लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले के बने होते हैं। मूविंग पार्ट्स नहीं होने के कारण इनकी कीमत भी कम होती है। एलसीडी में बेहतर सेचुरेशन, कम नॉइज मिलता है और ये बड़े वेन्यूज के लिए बेहतर माने जाते हैं। इनमें कम कंट्रास्ट होता है।

एलईडी प्रोजेक्टर: एलईडी प्रोजेक्टर्स की छोटी एलईडी होती हैं और इनका जीवनकाल 20,000 घंटे से ज्यादा होता है। कम बिजली की खपत के साथ इसमें कलर्स भी अच्छे आते हैं। दोनों प्रोजेक्टर की मुकाबले ये छोटे होते हैं और इनसे कम हील निकलती है। साथ ही इनमें ब्राइटनेस सीमित होती है।

पॉकेट प्रोजेक्टर: पॉकेट या पिको प्रोजेक्टर में एलईडी लाइट सोर्स के तौर पर यूज़ होती है, जिसकी वजह से ये काफी कॉम्पैक्ट होते हैं। आप इन्हें पॉकेट में कैरी कर सकते हैं। आप इन्हें मोबाइल फोन्स या हैंडहोल्ड डिजिटल कैमरा के साथ भी इंटिग्रेट कर सकते हैं। ये प्रोजेक्टर छोटे और डार्क रुम में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। आप 60 इंच तक की स्क्रीन साइज चुन सकते हैं और अपने स्मार्टफोन, गेमिंग कंसोल्स और लैपटॉप्स को इनसे जोड़ सकते हैं।

 
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English summary
What is the Mean, Types and Benefits of Projectors. We will tell you that how can you convert our house to a cinema hall with the help of Projectors.
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