Jio इंस्टीट्यूट के विवादों में आने का कारण क्या है...?
रिलायंस जियो आज के समय में बुलंदियों के आसमान छू रही है। जियो की सर्विस पर लोग आंख बंद करके भरोसा करने लगे हैं। जियो टेलिकॉम सेक्टर के आलावा बाकी चीजों पर भी काम कर रही है, लेकिन कई बार चीजें अपने हिसाब से होने में समय लग जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है।

बता दें, मुकेश अंबानी का जियो इंस्टीट्यूट विवादों में आ गया है। संस्थान ने न तो कैंपस का निर्माण शुरू कियाा है और न ही कोई प्लान दिया है। जबकि जियो को एक साल के भीतर संस्थान को उत्कृष्ट बनाने की रिपोर्ट पेश करनी थी। इस लापरवाही के चलते एम्पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी (EEC) ने जियो को नोटिस जारी कर दिया है।
ईईसी के चेयरमैन एन गोपालस्वामी ने बताया कि जियो ने माना है कि उनके काम में देरी हुई है और उन्होंने आश्वासन भी दिया कि वे चीजों को तेजी से बढ़ाएंगे। गोपालस्वामी ने कहा कि हमने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने की मांग की है। आरआईएल और Jio संस्थान की टीम ने इस मामले को लेकर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया पेश नहीं की है। जियो के साथ समझौता करने में जुटे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने भी कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि Jio संस्थान की टीम ने EEC को समीक्षा बैठक में बताया कि इसका मुख्य परिसर अब महाराष्ट्र में कर्जत के बजाय नवी मुंबई में आएगा।
आरआईएल को कर्जत में कैंपस बनाने की परमिशन नहीं मिल पा रही थी। मामले के जानकार एक व्यक्ति ने बताया कि नवी मुंबई में भी निर्माण की अनुमति देने के लिए भूमि के उपयोग को बदलने के लिए आवश्यक अनुमतियां भी अभी तक नहीं मिली है। केंद्र सरकार ने जियो समेत छह संस्थानों को उत्कृष्टता का दर्जा बीते साल दिया था। इन छह संस्थानों में सिर्फ जियो ही ऐसा था जिसका न तो कोई कैंपस था न ही छात्र और फैकल्टी। सरकार इन संस्थानों को एक हजार करोड़ रुपए का फंड देकर विश्व स्तरीय बनाना चाहती है।


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